कड़ाके की ठंड में अस्पताल बाहर सो रहे मरीजों पर हाईकोर्ट सख्त: सब-वे में बेड, टेंट लगाओ आज शाम तक!

मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं चलेगा: हाईकोर्ट ने DUSIB को दिए तुरंत आश्रय के निर्देश

नई दिल्ली: भीषण शीत लहर के बीच दिल्ली के बड़े अस्पतालों के बाहर फुटपाथ पर कंबल ओढ़कर सोने को मजबूर मरीजों, उनके तीमारदारों और परिवारजनों की दयनीय हालत पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक बार फिर तीखी टिप्पणी की और तत्काल राहत के लिए कई सख्त निर्देश जारी किए। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने स्पष्ट कहा कि भारत एक कल्याणकारी राज्य है और यहां नागरिकों को पर्याप्त आश्रय न देना उनके मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। सरकार और उसकी एजेंसियां इस जिम्मेदारी से किसी भी बहाने मुंह नहीं मोड़ सकतीं।

कोर्ट ने स्वतः संज्ञान वाली जनहित याचिका में कहा कि जमीनी हकीकत अधिकारियों के दावों से बिल्कुल अलग है। रैन बसेरों में जगह नहीं, सुविधाएं नाकाफी, जल आपूर्ति की कमी, आग का खतरा और महिलाओं से जुड़े कई मुद्दे हैं। हस्तक्षेपकर्ता सेंटर फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट (CHD) के वकील ने 13 जनवरी की रात के चित्र पेश किए, जो रैन बसेरों की बदहाली साफ दिखाते हैं।

अस्पतालों के बाहर हजारों लोग ठंड से जूझ रहे  

एम्स, सफदरजंग, राम मनोहर लोहिया, ट्रॉमा सेंटर और लेडी हार्डिंग जैसे बड़े अस्पतालों के बाहर दूर-दराज के राज्यों से आए मरीज और उनके परिजन इलाज के इंतजार में खुले में रात काट रहे हैं। तापमान 4-5 डिग्री सेल्सियस तक गिरने और घने कोहरे के बीच लोग पुराने कंबल या चादर में लिपटकर ठंड सह रहे हैं। रैन बसेरे भरे होने और अपर्याप्त होने से स्थिति और खराब हो गई है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने शीत लहर की आपात स्थिति से निपटने के लिए अल्पकालिक उपायों के तहत कई महत्वपूर्ण और सख्त निर्देश जारी किए हैं।

कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) आज शाम ही अस्पतालों के आसपास स्थित सब-वे (अंडरपास) को अस्थायी रूप से अपने कब्जे में ले ले और वहां मरीजों तथा उनके परिजनों के लिए पर्याप्त संख्या में बेड की व्यवस्था करे। साथ ही, अस्पतालों के नजदीक उपलब्ध खाली स्थानों पर तुरंत टेंट या पंडाल लगाकर आश्रय प्रदान किया जाए ताकि जितने संभव हो उतने लोगों को ठंड से बचाया जा सके।

इस संबंध में सभी संबंधित एजेंसियां जैसे दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली नगर निगम (MCD), नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC), अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), दिल्ली पुलिस, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) तथा अन्य अस्पताल प्रशासन DUSIB के साथ पूर्ण सहयोग करेंगी। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि कोई एजेंसी सहयोग नहीं करती तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा।

अगला महत्वपूर्ण निर्देश यह है कि 15 जनवरी सुबह 10 बजे दक्षिण जिले के प्रधान जिला न्यायाधीश की अध्यक्षता में साकेत कोर्ट परिसर में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में NDMC, MCD, AIIMS, DUSIB सहित सभी संबंधित विभागों के शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। बैठक का उद्देश्य अल्पकालिक योजना तैयार करना होगा, जिसे कल से ही लागू करना शुरू कर दिया जाएगा। यदि बैठक में किसी मुद्दे पर मतभेद होता है तो प्रधान जिला न्यायाधीश का निर्णय अंतिम माना जाएगा।

बैठक समाप्त होने के बाद प्रधान जिला न्यायाधीश एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिसे अगली सुनवाई में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। कोर्ट ने सभी संबंधित वकीलों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने विभागों को इस आदेश की तुरंत सूचना दें और अधिकारियों को बैठक के लिए अलग से कोई नोटिस जारी करने की आवश्यकता नहीं होगी।

ये निर्देश अस्पतालों के बाहर ठंड में ठिठुरते हजारों मरीजों और उनके परिवारजनों को तत्काल राहत पहुंचाने के उद्देश्य से दिए गए हैं, ताकि कड़ाके की ठंड में उनकी जान को कोई खतरा न हो।

कोर्ट ने AIIMS, MCD, NDMC, DMRC, PWD, पुलिस, DDA, DJB, BSES, सफदरजंग मेडिकल कॉलेज, ट्रॉमा सेंटर आदि को भी पक्षकार बनाया है। दीर्घकालिक उपायों पर वकीलों से सुझाव मांगे गए हैं। अगली सुनवाई 16 जनवरी को होगी।

कोर्ट की सख्त टिप्पणियां  

पीठ ने कहा, “भगवान न करे, अगर हममें से किसी को एक रात भी ऐसे रैन बसेरे में गुजारनी पड़े, तो हालात क्या होंगे।” अधिकारियों से संवेदनशीलता बरतने को कहा गया। यह आदेश उन लाखों गरीबों के लिए बड़ी उम्मीद है जो इलाज की आस में दिल्ली आए हैं लेकिन ठंड और आश्रय की कमी से दोहरी मार झेल रहे हैं।

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