नकली अमूल-पतंजलि घी और टाटा नमक का रैकेट पकड़ा, क्राइम ब्रांच ने चार को धर दबोचा, लाखों का फर्जी माल जब्त

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (ईस्टर्न रेंज-आई) ने घरेलू उपयोग की मशहूर ब्रांडेड वस्तुओं के नकली उत्पाद बनाने और बेचने वाले एक बड़े संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस रैकेट में अमूल, पतंजलि, मधुसूदन का नकली घी, टाटा नमक, ईनो, ऑल आउट और वीट जैसे उत्पाद शामिल थे, जो लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरे में डाल रहे थे। पुलिस ने चार मुख्य आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया और भारी मात्रा में फर्जी सामान बरामद किया।

क्राइम ब्रांच के डीसीपी विक्रम सिंह ने बताया कि 29 दिसंबर को गुप्त सूचना मिली थी कि उत्तम नगर के दल मिल रोड पर नितिन कुमार अपने साथियों राजत सिंघल उर्फ चिंटू और सुरेंद्र गुज्जर के साथ नकली ब्रांडेड सामान की बड़ी खेप लेने वाला है। एसीपी सुनील श्रीवास्तव की देखरेख में इंस्पेक्टर लिछमन और एसआई शैलेंद्र तिवारी की टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की। दोपहर करीब ढाई बजे एक टेंपो और अन्य वाहनों से सामान उतारते समय आरोपियों को पकड़ लिया गया।

वाहनों की तलाशी में 1131 लीटर नकली घी (अमूल 531 लीटर, पतंजलि 255 लीटर, मधुसूदन 345 लीटर), 8640 ईनो के पाउच, 1200 ऑल आउट, 1152 वीट उत्पाद और 3000 किलोग्राम नकली टाटा नमक बरामद हुआ। नितिन की निशानदेही पर कांझावाला इंडस्ट्रियल एरिया में छापा मारा गया, जहां नकली घी बनाने की अवैध यूनिट मिली। यहां पैकेजिंग मशीनें, फर्जी रैपर और मिलावटी कच्चा माल जब्त किया गया।

इसके अलावा निलोठी एक्सटेंशन/निहाल विहार में एक गोदाम पर रेड में 2000 किलोग्राम फर्जी टाटा नमक, रिपैकिंग मशीनें, सीलिंग मशीन और हजारों खाली पाउच मिले। टाटा कंपनी के प्रतिनिधि ने सभी सामान को पूरी तरह नकली करार दिया। गिरफ्तार आरोपी नितिन कुमार (38), राजत सिंघल उर्फ चिंटू (38), सुरेंद्र गुज्जर (45) और मुजाहिद उर्फ कार्तिक (38) लंबे समय से थोक और खुदरा बाजार में सस्ते दामों पर यह फर्जी माल सप्लाई कर मोटा मुनाफा कमा रहे थे।

पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि वे मिलावटी सामग्री से घी बनाते और असली जैसे लेबल लगाकर बाजार में उतारते थे। नितिन पर पहले भी ऐसे मामले दर्ज हैं। क्राइम ब्रांच में भारतीय न्याय संहिता और कॉपीराइट एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। जांच जारी है और गिरोह के बड़े नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है।

Comments are closed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More