यूपी कैबिनेट ने कई प्रस्तावों पर लगाई मुहर, अब वृद्धावस्था पेंशन के लिए आवेदन नहीं करना पड़ेगा, लेखपाल सेवा नियमों में बदलाव

राष्ट्रीय जजमेंट

लखनऊ: उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक शुक्रवार को सीएम योगी की अध्यक्षता में हुई. बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगेगी. यूपी कैबिनेट ने बैठक के दौरान पहले भारतीय महिला क्रिकेट टीम को शुभकामनाएं दी. इसके अलावा दिल्ली में हुए आतंकी हमले को लेकर निंदा प्रस्ताव भी पास किया. मीटिंग के बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, मंत्री अनिल राजभर, परिवहन मंत्री और राकेश सचान ने मीडियो को कैबिनेट मीटिंग में पास हुए प्रस्तावों का जानकारी दी.10 वर्ष तक के किरायेदारी पर स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में राहत
प्रदेश सरकार ने राज्य में किरायेदारी को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए भी बड़ा फैसला लिया है. कैबिनेट ने 10 वर्ष तक की अवधि के किरायानामा विलेखों डीड) पर स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट मंजूर कर दी है. इसका उद्देश्य यह है कि भवन मालिकों और किरायेदार दोनों किरायानामा लिखित रूप में तैयार करें और रजिस्ट्री कराएं, जिससे विवाद कम हों और किरायेदारी विनियमन अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके.
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि वर्तमान नियमों के अनुसार एक वर्ष से अधिक अवधि की किरायेदारी विलेख की रजिस्ट्री अनिवार्य है, लेकिन आमतौर पर अधिकांश किरायानामे मौखिक होते हैं या यदि लिखित होते भी हैं तो उनकी रजिस्ट्री नहीं कराई जाती. ऐसे मामलों का पता आमतौर पर जीएसटी विभाग और बिजली विभाग जैसी एजेंसियों की पत्रावलियों की जांच में चलता है और बाद में कमी स्टाम्प शुल्क की वसूली की कार्रवाई करनी पड़ती है. यह भी अनिवार्य है कि किरायेदारी विलेख की रजिस्ट्री हो या न हो, उस पर सही स्टाम्प शुल्क हर हाल में जमा होना चाहिए.सरकार का मानना है कि यदि शुल्क अधिक होता है तो लोग विलेख लिखने और रजिस्ट्री कराने से बचते हैं. इसी वजह से मानक किरायेदारी विलेख को बढ़ावा देने और 10 वर्ष तक की अवधि के रेंट एग्रीमेंट को औपचारिक बनाने के लिए शुल्क में व्यापक छूट देने की जरूरत महसूस की गई. इस छूट प्रणाली के तहत किरायेदारी विलेख पर अधिकतम स्टाम्प शुल्क और अधिकतम रजिस्ट्रेशन फीस अब निश्चित राशि से अधिक नहीं ली जाएगी. साथ ही औसत वार्षिक किराया तय करते समय अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये रखी गई है. टोल संबंधी पट्टे और खनन पट्टों को छूट से बाहर रखा गया है.स्टाम्प एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने बताया कि नई व्यवस्था के अनुसार अधिकतम स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्री शुल्क की सीमा तय कर दी गई है. यह सीमा किरायेदारी की अवधि और औसत वार्षिक किराए के आधार पर लागू होगी. इसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा क्योंकि अब किरायेदारी विलेख पर भारी स्टाम्प शुल्क भरने की बाध्यता नहीं रहेगी और लोग अधिक सहजता से रजिस्ट्री करा सकेंगे.निर्धारित अधिकतम स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रीकरण फीसऔसत वार्षिक किराया ₹ 2,00,000 रुपये तक1 वर्ष तक 500 रुपये, 1 से 5 वर्ष 1500 रुपये, 5 से 10 वर्ष 2000 रुपयेऔसत वार्षिक किराया ₹ 2,00,001 से ₹ 6,00,000 रुपये01 वर्ष तक 1500 रुपये, 1 से 5 वर्ष 4500 रुपये, 5 से 10 वर्ष 7500 रुपयेऔसत वार्षिक किराया ₹ 6,00,001 से 10,00,000 रुपये1 वर्ष तक 2500 रुपये, 1 से 5 वर्ष 6000 रुपये, 5 से 10 वर्ष 10000 रुपयेअब चैनमैन भी बन सकेंगे लेखपाल, नई नियमावली को मंजूरीप्रदेश कैबिनेट ने लेखपाल सेवा नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए चैनमैन के लिए लेखपाल पद पर पदोन्नति का मार्ग खोल दिया है. वित्त मंत्री सुरेशा खन्ना ने बताया कि पंचम संशोधन नियमावली 2025 के तहत अब लेखपाल के कुल पदों में से दो प्रतिशत पद योग्य चैनमैन को पदोन्नति के आधार पर दिए जा सकेंगे. यह पहली बार है, जब चैनमैन को सीधी भर्ती व्यवस्था से बाहर निकलकर लेखपाल पद तक प्रमोशन का अवसर मिलेगा. वर्तमान में लेखपाल के सभी पदों पर भर्ती अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से की जाती है. प्रदेश में कुल 30837 स्वीकृत पदों में से 21897 पर तैनाती है, जबकि 8940 पद रिक्त हैं. नई व्यवस्था के तहत वे चैनमैन पदोन्नति के लिए पात्र होंगे जो मौलिक रूप से इसी पद पर नियुक्त हों, भर्ती वर्ष के पहले दिन तक छह वर्ष की सेवा पूरी कर चुके हों और इंटरमीडिएट या समकक्ष परीक्षा पास कर चुके हों. इन पात्र चैनमैन का चयन चयन समिति की सिफारिश पर किया जाएगा. सरकार का कहना है कि अनुभवी चैनमैन को लेखपाल के रूप में पदोन्नत करने से न सिर्फ विभाग की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन भी और तेज होगा. इससे आम जनता को राजस्व विभाग की सेवाएं समय पर और अधिक दक्षता के साथ मिल सकेंगी.बागपत में पीपीपी मोड पर बनेगा मेडिकल कॉलेजवित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने जनपद बागपत में पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए 5.07 हेक्टेयर भूमि निःशुल्क चिकित्सा शिक्षा विभाग को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है. यह भूमि ग्राम मीतली में स्थित है और मत्स्य विभाग के पास थी. विवादित 0.53 हेक्टेयर हिस्से को छोड़कर शेष भूमि पर कॉलेज का निर्माण किया जाएगा. बता दें कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के 60 जिलों में राजकीय और निजी क्षेत्र के कुल 80 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं, लेकिन बागपत अब तक इस सुविधा से वंचित था.दुकान और वाणिज्य अधिष्ठान कानून में संशोधनकैबिनेट ने दुकान और वाणिज्य अधिष्ठान अधिनियम 1962 में महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी देते हुए इसकी सीमा नगरीय क्षेत्रों से बढ़ाकर पूरे प्रदेश तक कर दी है. अब राज्य के सभी जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिष्ठान भी इस कानून के दायरे में आएंगे. इससे अधिकतम श्रमिक कानूनी संरक्षण के दायरे में आएंगे और उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी. श्रम मंत्री अनिल राजभर ने बताया कि संशोधन के तहत यह अधिनियम अब उन प्रतिष्ठानों पर लागू होगा, जिनमें 20 या उससे अधिक लोग कार्यरत हैं. इससे छोटे प्रतिष्ठान बिना अतिरिक्त बोझ के अपनी आर्थिक गतिविधि को सुचारू रख सकेंगे, जबकि बड़े प्रतिष्ठानों में कार्यरत कर्मचारियों को अधिनियम के तहत मिलने वाले सभी लाभ मिलेंगे. इससे प्रदेश में व्यापारिक गतिविधियां और तेज होंगी.श्रम मंत्री ने बताया कि संशोधन का दायरा बढ़ाते हुए सरकार ने चिकित्सकीय इकाइयों जैसे क्लीनिक, पॉलीक्लीनिक, प्रसूति गृह, आर्किटेक्ट, कर सलाहकार, तकनीकी सलाहकार, सेवा प्रदाता, सेवा मंच और इसी तरह के अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी कानून के अंतर्गत शामिल कर दिया है. इससे इन प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी सुरक्षित कार्य परिस्थितियों और लाभों का अधिकार प्राप्त होगा.वृद्धावस्था पेंशन के लिए लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत नहींवहीं, कैबिनेट ने राज्य में वृद्धावस्था पेंशन को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया है. अब पात्र वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन के लिए अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी. समाज कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने बताया कि फैमिली आईडी ‘एक परिवार-एक पहचान’ प्रणाली से पात्र लाभार्थियों का स्वतः चिन्हीकरण होगा और उनकी सहमति मिलने पर पेंशन सीधे स्वीकृत की जाएगी. वर्तमान में 67.50 लाख वरिष्ठ नागरिक इस योजना का लाभ ले रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जो प्रक्रिया पूरी न कर पाने के कारण पेंशन से बाहर रह जाते हैं. नया फैसला इसी समस्या को हल करने पर केंद्रित है.नई व्यवस्था में फैमिली आईडी के आधार पर उन नागरिकों की सूची स्वतः तैयार होगी, जिनकी आयु अगले 90 दिनों में 60 वर्ष होने जा रही है. यह सूची एपीआई के माध्यम से समाज कल्याण विभाग के पेंशन पोर्टल पर भेजी जाएगी. विभाग सबसे पहले एसएमएस, व्हाट्सऐप और फोन कॉल जैसे डिजिटल माध्यमों से पात्र नागरिकों से सहमति लेगा. जिनकी सहमति डिजिटल रूप से नहीं मिलेगी, उनसे ग्राम पंचायत सहायक, कॉमन सर्विस सेंटर या विभागीय कर्मचारी भौतिक रूप से संपर्क करेंगे. दोनों स्तरों पर सहमति न मिलने पर ऐसे नाम प्रक्रिया से हटा दिए जाएंगे. उन्होंने बताया कि सहमति मिलने के बाद योजना अधिकारी 15 दिनों के भीतर डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से पेंशन स्वीकृत करेंगे और स्वीकृति पत्र लाभार्थी को डाक से भेजा जाएगा. भुगतान सीधे आधार-लिंक्ड बैंक खाते में किया जाएगा और हर किस्त की जानकारी एसएमएस द्वारा उपलब्ध होगी. सरकार एक मोबाइल ऐप भी उपलब्ध कराएगी, जिसमें लाभार्थी पासबुक की तरह अपने सभी भुगतान देख सकेंगे.

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