अशोक विहार में सीवर सफाई के दौरान हादसा: एक मजदूर की मौत, तीन ICU में भर्ती, केस दर्ज

नई दिल्ली: दिल्ली के अशोक विहार फेज-II में हरिहर अपार्टमेंट के पास मंगलवार रात एक दर्दनाक हादसे ने मैनुअल स्कैवेंजिंग की भयावह सच्चाई को फिर उजागर कर दिया। सीवर की सफाई के दौरान जहरीली गैसों के संपर्क में आने से चार मजदूर बेहोश होकर सीवर में गिर गए। इनमें से एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य की हालत गंभीर बनी हुई है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में मैनुअल स्कैवेंजिंग निषेध अधिनियम 2013 के तहत केस दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी है।

हादसा मंगलवार रात करीब 11:36 बजे हुआ, जब पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि अशोक विहार में सीवर सफाई के दौरान चार मजदूर सीवर में गिर गए हैं। मौके पर पहुंची पुलिस और क्राइम टीम ने जांच शुरू की। मृतक की पहचान कासगंज, उत्तर प्रदेश निवासी अरविंद (40 वर्ष) के रूप में हुई, जिन्हें दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में मृत घोषित किया गया। अन्य तीन मजदूर कासगंज, उत्तर प्रदेश निवासी सोनू व नारायण और विहार के नरेश को गंभीर हालत में ICU में भर्ती किया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, ये मजदूर जहरीली गैसों के कारण अचेत अवस्था में हैं।

पुलिस के अनुसार, पिछले कई दिनों से इस इलाके में बृजगोपाल कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा सीवर सफाई का काम चल रहा था। कंपनी के मैनेजर को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि मजदूरों को बिना उचित सुरक्षा उपकरणों के सीवर में उतारा गया, जो मैनुअल स्कैवेंजिंग निषेध अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है।

पुलिस ने इस मामले में भारतीय नवीन संहिता की धारा 106(1), 289 और 337 के साथ-साथ मैनुअल स्कैवेंजिंग निषेध और पुनर्वास अधिनियम, 2013 की धारा 7 और 9 के तहत केस दर्ज किया है।

क्या है मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट?

भारत में ‘मैनुअल स्कैवेंजर्स के रूप में नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013’ (MS Act, 2013) के तहत हाथ से मैला ढोने (मैनुअल स्कैवेंजिंग) की प्रथा को प्रतिबंधित किया गया है. यह 6 दिसंबर, 2013 से लागू हुआ. इस अधिनियम का उद्देश्य अस्वच्छ शौचालयों, सीवर और सेप्टिक टैंकों से मानव मल को हाथ से साफ करने, उठाने या ले जाने जैसी अमानवीय प्रथा पर रोक लगाना और ऐसे कार्य करने वालों का पुनर्वास करना है। इसके बावजूद, देशभर में ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं, जो सुरक्षा उपायों की कमी और ठेकेदारों की लापरवाही को दर्शाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मजदूरों को बिना गैस मास्क, ऑक्सीजन सिलेंडर या अन्य सुरक्षा उपकरणों के सीवर में उतारना मौत को दावत देना है।

पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। यह घटना एक बार फिर मैनुअल स्कैवेंजिंग के खतरों और इस अमानवीय प्रथा को खत्म करने में प्रशासनिक विफलता पर सवाल उठाती है।

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