राष्ट्रीय जजमेंट न्यूज
मरीजों को आधा अधूरा पर्चा लिखे जाने के मामले में दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने संज्ञान लिया है और जूनियर से लेकर रेजिडेंट और संकाय सदस्यों को जागरूक रहने के लिए कहा है।
दिल्ली एम्स की प्रवक्ता डॉ.रीमा दादा ने शुक्रवार को कहा कि इलाज के बारे में पूरी जानकारी मिलना मरीज का अधिकार होता है। इसे लेकर दिल्ली एम्स हमेशा से गंभीर रहा है। एम्स का लगातार प्रयास है कि मरीज को लिखी जाने वाली पर्ची में हर वो जानकारी होनी चाहिए जो रोगी को सीधे समझ आ सके। दवा का फॉर्मूलेशन, उसका जेनेरिक नाम, दवा की खुराक कितनी और किस समय पर लेनी है? इसके अलावा एंटीबायोटिक दवाओं का कम से कम इस्तेमाल पर जोर रहता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली एम्स में हर दिन करीब 18 से 20 हजार मरीज इलाज कराने आ रहे हैं। ऐसे में आधी अधूरी पर्ची होने की भूल से इन्कार भी नहीं किया जा सकता है।
दरअसल, देश के 13 अस्पतालों में डॉक्टरों की पर्ची को लेकर अध्ययन हुआ है जिसकी रिपोर्ट भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने तैयार की है। इसमें दिल्ली एम्स भी शामिल है जहां से करीब 600 मरीजों की पर्ची को लेकर विश्लेषण किया। इसका खुलासा 12 अप्रैल को अमर उजाला ने प्रमुखता से किया जिस पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली एम्स ने आईसीएमआर और भारत सरकार के स्वास्थ्य महानिदेशालय के जारी दिशा निर्देशों का पालन करने के लिए कहा है। सूत्रों से जानकारी यह भी है कि इस मामले में स्वास्थ्य महानिदेशालय ने सभी अस्पतालों से सुधार के लिए कहा है। हालांकि स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ.अतुल गोयल से प्रतिक्रिया नहीं मिली।
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