परिवार का था इकलौता चिराग, ईरान ने दी मौत

राष्ट्रीय जजमेंट

ईरान ने 17 साल के नाबालिग को फांसी पर लटका दिया है. इस नाबालिक लड़के का नाम हामिद्रेजा अजारी है. इस साल मई के महीने में ईरान ने उसे मौत की सजा सुनाई थी. एक नाबालिग को फांसी देना यूएन कन्वेंशन के नियमों का उल्लघन है. बता दें कि ईरान इस साल अब तक 685 लोगो को फांसी पर लटका चुका है. यह आंकड़ा ईरानी ह्यूमन राइट्स ग्रुप का है. बता दें कि ईरान ने जिस नाबालिग लड़के को फांसी दी है, वह अपने परिवार का इकलौता चिराग था. स्क्रैप वर्कर यानी कबाड़ी उठाने का काम करता था. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अपराध के समय वह 16 साल का था और जब उसे फांसी पर लटकाया गया तब उसकी उम्र महज 17 साल थी. ईरानी मानवाधिकार समूहों ने कहा कि यह फांसी बाल अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन का उल्लंघन है. यह फांसी संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन का उल्लंघन संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन 18 साल से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति को बच्चा ही मानता है. ईरानी मानवाधिकार समूहों का कहना है कि यह फांसी बाल अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन का उल्लंघन है. कन्वेंशन 18 साल से कम आयु के किसी भी व्यक्ति को बच्चे के मानता है. मानवाधिकार ग्रुप ने कहा कि ईरान उन कुछ चुनिंदा देशों में एक है, जो नाबालिग को भी मौत की सजा देता है. 13 साल में 68 नाबालिगों को फांसी ईरान में सबसे ज्यादा नाबालिग को फांसी दी जाती है.ईरान ह्यूमन राइट्स ग्रुप के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 13 साल में यानी 2010 से अब तक 68 नाबालिगों को फांसी दी गई है. वैसे ईरान में 18 साल के बाद ड्राइविंग लाइलेंस मिलता है, लेकिन 15 साल की उम्र में फांसी की सजा हो जाती है. बता दें कि ईरानी ह्यूमन राइट्स ग्रुप ने आरोप लगाया है कि ईरानी मीडिया उस नाबालिग लड़के की उम्र 18 साल बता रही है.

Comments are closed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More