कानपुर में ठंड से 183 हार्ट अटैक तो 28 मौत ब्रेन स्ट्रोक से हुई

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RJ news

UP में कड़ाके की ठंड के बीच ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक जानलेवा साबित हो रहा है। SGPGI में गर्मियों के 8 महीने में ब्रेन स्ट्रोक के 34 मरीज भर्ती हुए थे। मगर सर्दियों के पिछले 30 दिन में ही 28 मरीज भर्ती हो चुके हैं। ये आंकड़ा सिर्फ एक संस्थान का है। पूरी तस्वीर डराने वाली है। इनमें हेमोरेजिक स्ट्रोक और इस्मिक स्ट्रोक के मामले सबसे ज्यादा हैं।

मेडिकल एक्सपर्ट कहते हैं कि ब्रेन स्ट्रोक केस में ब्लड वेसल्स फट जाती हैं। ब्रेन में ब्लीडिंग शुरू होने से मौत तक हो सकती है। अब सर्दियों में कानपुर के अस्पतालों में पिछले 17 दिन में 45 ब्रेन स्ट्रोक के केस पहुंचे हैं। हार्ट अटैक के 183 मरीजों की मौत हो चुकी है। कॉर्डियोलॉजिस्ट कहते हैं कि हार्ट में ब्लॉकेज 60% तक बढ़ी है। इसलिए अटैक के चांसेज भी दोगुना हो गए हैं।

ऑक्सीजन या ग्लूकोस की कमी से होता है ब्रेन स्ट्रोक
डॉ. रुचिका टंडन कहती हैं कि ब्रेन यानी मस्तिष्क के किसी भी हिस्से में ऑक्सीजन या ग्लूकोस की कमी से ब्रेन स्ट्रोक होता हैं। ब्रेन स्ट्रोक में ब्लड फ्लो रुकने से आंखों की रोशनी तक जा सकती हैं। अचानक से मरीज अनकॉन्शियस यानी बेहोश हो जाता हैं। इन लक्षणों पर तत्काल अस्पताल पहुंचना होगा।

ब्लॉकेज बढ़ी, अब हार्ट अटैक के चांसेज दोगुना
LPS इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. विनय कृष्णा ने बताया कि नॉर्मल दिनों में अगर हार्ट की नसों में 30% ब्लॉकेज है, तो ठंड में नसें सिकुड़ने की वजह से वही ब्लॉकेज 60% तक हो जाता है। इस कंडीशन में पेशेंट का एंजाइन और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, ऐसे में हार्ट अटैक के चांसेज दोगुना हो जाते हैं।

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