बच्चो के स्वास्थय के साथ हो रहा खिलवाड़ हल्दी की जगह खाने के प्रयोग में लाया जा रहा रंग

नोटिस दिये बीते दो माह,महिला बाल विकास ने नहीं कि समूह संचालकों पर कोई कार्यवाही पुष्टिक आहार हल्दी के स्थान पर बच्चों के खाने व नास्ते में स्वास्थ्य पर विपरीत असर डालने बाले रंग का किया जा रहा था उपयोग

राष्ट्रिय जजमेंट न्यूज़

संवाददाता

गंजबासौदा-:शासन व सरकार बच्चों के प्रति बहुत ही संवेदनशील दिखाई पड़ती है साथ ही सरकार के प्रत्येक कार्यक्रम का प्रारम्भ कन्या पूजन के साथ होता है| साथ ही मध्य प्रदेश अनेक योजनाएं बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ, स्कूल भेजो अभियान समेत अनेक कार्यक्रम बच्चों के हित में चलाए जा रहे हैं| जिसमे से एक योजना शासन की है कि बच्चों को पुष्टिक आहार प्राप्त हो जिसके लिए मध्यान भोजन समेत आंगनवाड़ियों को छोटे छोटे बच्चों को शुद्ध व पुष्टिक आहार देने की जिम्मेदारी दी गई है |जिससे बच्चे तंदरुस्त व स्वस्थ्य रहें| लेकिन शासन की मंशा के विपरीत स्थानीय स्तर पर समूह संचालक व अधिकारी बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह नजर आ रहे हैं और निश्चिन्त होकर कोई बड़ी घटना का इंतजार करते दिख रहे हैं |

पूरा मामला यह है कि विदिशा जिले के गंजबासौदा शहर में 40 आंगनवाडी केंद्र हैं| जिनमें पुष्टिक आहार प्रदान करने के लिए 4 समूह को जिम्मेदारी दी गई है| लेकिन शासन व सरकार की पुष्टिक आहार की मंशा के विपरीत यह समूह संचालक बच्चों के आहार में शुद्ध पुष्टिक हल्दी की जगह बच्चों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर डालने बाला रंग का उपयोग भोजन व नास्ते में किया जा रहा था यह आरोप हम नहीं स्वम् महिला बाल विकास विभाग गंजबासौदा द्वारा इन चारों समूह संचालकों को दिए गए नोटिस में स्वम् कहा गया है|

हद ओर घनाघोर लापरवाही यह है कि आँख पर पट्टी बांधे बैठे अधिकारियों को बच्चों के स्वास्थ्य की बिल्कुल चिंता नहीं स्वम् 18 अक्टूबर को जांच की ओर 19 अक्टूबर को नोटिस दिया और स्वीकारा की यह कृत्य बच्चों के स्वास्थ्य के विपरीत असर डालता है फिर भी दो माह बीतने पर अब तक समूह संचालकों पर कोई कार्यवाही नहीं हुई और प्राप्त जानकारी व सूत्रों के अनुसार स्थानीय व जिला महिला बाल विकास के अधिकारी पूरे मामले को दवाने के प्रयास में लगे हैं अब यह समझ से परे है कि एक ओर पूरी सरकार सहित स्वम् मुख्यमंत्री महोदय बच्चों के प्रति इतने संवेदनशील रहते हैं तो वही स्वम् उनके ग्रह जिले के अधिकारी बच्चों के प्रति इतने लापरवाह कैसे हो सकते हैं| आख़िरकार क्या कारण है कि समूह संचालकों पर आज तक कार्यवाही नहीं कि गई है| यह प्रश्न आज कल आम चर्चाओं में बना हुआ है|

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