सुल्तानपुर : जनपद में हुआ डस्टबिन और कुर्सी घोटाला

कोरोना किट घोटाले से पहले सुल्तानपुर में हुआ डस्टबिन कुर्सी घोटाला जिले के चर्चित डीपीआरओ रहे के समय का है घोटाला।

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ग्रामसभा निधि के माध्यम से जनपद के विभिन्न ग्राम सभाओं में जबरन कराया गया भुगतान।  12 सौ की डस्टबिन का 12000 तक कराया गया पेमेंट बड़े भ्रष्टाचार में संलिप्त जिले के उच्च अधिकारी सूत्रों के हवाले से मिली खबर। 2200 से 2500 की कीमत की कुर्सियों का पेमेंट 10 से ₹12000 तक कराया गया है।
सुल्तानपुर जनपद पूरे प्रदेश में करो ना किट घोटाले के खुलासे को लेकर पूरे प्रदेश मैं सुल्तानपुर जनपद की चर्चा काकी हो रही है! अब ताजा मामला सुल्तानपुर के एक नए घोटाले से जुड़ा हुआ है सुल्तानपुर जनपद में कुर्सी डस्टबिन घोटाला हुआ है जनपद के विभिन्न विकास खंडों के विभिन्न ग्राम सभाओं में कुर्सी डस्टबिन स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत योजना ग्राम सभाओं में डस्टबिन लगवाने का काम सरकार ने किया लेकिन सरकार के मातहत अधिकारियों ने इसे अपना भ्रष्टाचार का अड्डा बना रखा ग्राम सभाओं में कुर्सी घोटाला 2200 से 2500 कीमत की कुर्सियों का 8 से ₹10000 तक भुगतान किया गया है |
कुर्सी डस्टबिन घोटाले में उच्च अधिकारियों समेत ग्राम प्रधान मोटी रकम कमाई और लाखों करोड़ों रुपए कागजों में पेमेंट कर डकार गए ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव इस भ्रष्टाचार में जिले के उच्च अधिकारी समेत कई विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत गांवों की तरक्की, विकास एवं निर्माण के लिए आने वाली राशि से मनमाने ढंग से ग्राम पंचायतों में लगवाए गए डस्टबिन आपूर्ति एवं खरीद घोटाला के अभिलेख पहुंच से दूर हैं। जीपीडीपी (ग्राम पंचायत डेवलपमेंट प्रोग्राम) में कार्ययोजना के बिना ही विकास खंडों की ग्राम पंचायतों डस्टबिन की खरीदारी होने का मामला उजागर हुआ है।
मामले की जांच उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान की ओर से की जा रही है, लेकिन ग्राम पंचायतों से अभिलेखों के न मिलने से आपूर्ति एवं खरीदारी के लिए दोषी कौन है का राज दबा हुआ ही है। ग्राम पंचायत निधि से विकास खंड बावन एक पंचायतों में सूखा कूड़ा एवं गीला कूड़ा निस्तारण वाले प्लास्टिक के डस्टबिन लगवाए गए। बताया गया कि एक डस्टबिन की कीमत 9 हजार 800 रुपये के हिसाब से भुगतान के लिए फर्म ने बिल भी उपलब्ध कराए थे।
प्रशासन की सिफारिश पर सतर्कता अधिष्ठान ने जांच तो शुरू की, लेकिन कई माह बीतने के बाद भी अभी तक अभिलेख उपलब्ध नहीं हो पाए हैं। नियमों की उड़ाई गईं धज्जियां , डस्टबिन न केवल गुणवत्ता बल्कि नियमों की भी धज्जियां उड़ाई गई थीं। न ग्राम पंचायत डेवलपमेंट प्रोग्राम बनाया गया, न ही कोई प्रक्रिया पूरी की गई। बस फर्म ने डस्टबिन गांवों में भेज दिए और गांवों से चेक ले ली गई। वह भी जितने का डस्टबिन था, कहीं कहीं तो दोगुनी तक चेक ली गई।
बृजेश कुमार राष्ट्रीय जजमेंट संवाददाता जिला सुल्तानपुर

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