इंदौर में चल रहे अवैध फॉरेक्स ट्रेडिंग कॉल सेंटर का भंडाफोड़; मालिक व टीम लीडर सहित 6 ठग गिरफ्तार, 1 करोड़ का फ्रॉड उजागर

नई दिल्ली: दिल्ली के वेस्ट जिले की साइबर थाना पुलिस टीम ने संगठित साइबर निवेश धोखाधड़ी के खिलाफ एक बहुत बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए मध्य प्रदेश के इंदौर में चल रहे एक हाईटेक और अवैध कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है, जो फॉरेक्स ट्रेडिंग और ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट स्कीम के नाम पर देश भर के भोले-भाले लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान कॉल सेंटर के मालिकों और टीम लीडरों सहित गिरोह के 6 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मुख्य मास्टरमाइंड व मालिक कार्तिक अग्रवाल, सह-मालिक राजा अग्रवाल और टीम लीडर हर्ष केशरे, निखिल भाल्से, दीपक उमाथ व विपिन यादव के रूप में हुई है। पुलिस टीम ने छापेमारी के दौरान मौके से 29 कंप्यूटर सिस्टम, 47 मोबाइल फोन, 46 सिम कार्ड, नोट गिनने की मशीन, स्वाइप पीओएस मशीनें, ₹1,21,300 नगद कैश और अमेरिकी डॉलर सहित विदेशी मुद्रा बरामद की है। अब तक की जांच में इस गिरोह द्वारा करीब 1 करोड़ रुपये की ठगी किए जाने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है।

वेस्ट जिले के डीसीपी दराड़े शरद भास्कर ने बताया कि इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब दिल्ली निवासी मनोज चौहान ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर एक शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने आरोप लगाया कि आस्था मैडम नाम की एक महिला ने उससे संपर्क किया और मेटा कोटीज कंपनी के जरिए फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश करने का लालच दिया। पीड़ित को भरोसे में लेने के लिए एक फर्जी ट्रेडिंग डैशबोर्ड दिखाया गया, जिसमें फर्जी मुनाफा प्रदर्शित किया जा रहा था। इसके बाद टैक्स, जीएसटी, पैनल्टी, लेवरेज चार्ज और अकाउंट अनलॉकिंग फीस के नाम पर पीड़ित से अलग-अलग बैंक खातों में ₹10,51,079 की रकम ट्रांसफर करवा ली गई। शिकायत के आधार पर वेस्ट जिला साइबर थाने में बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत ई-एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी (ऑपरेशन्स) विजय सिंह के पर्यवेक्षण और साइबर थाना एसएचओ इंस्पेक्टर विकास कुमार बुल्दक के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसमें सब-इंस्पेक्टर अमित मलिक, हरिओम, हेड कांस्टेबल सुनील, संजीत, अमर और महिला हेड कांस्टेबल नीलम शामिल थे। जांच टीम ने सैकड़ों मोबाइल नंबरों, आईएमईआई नंबरों और बैंक खातों के वित्तीय ट्रेल का गहन विश्लेषण किया, जिसके तार मध्य प्रदेश के इंदौर से जुड़े पाए गए।

तकनीकी इनपुट्स और स्थानीय खुफिया जानकारी के आधार पर दिल्ली पुलिस की टीम ने इंदौर के आरएनटी मार्ग स्थित कॉर्पोरेट हाउस की चौथी मंजिल पर स्थित बीजेटी ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी पर अचानक छापा मारा। पुलिस टीम जब अंदर दाखिल हुई तो वहां पूरी तरह से एक अवैध कॉल सेंटर संचालित हो रहा था, जहां 35 टेली-कॉलर लड़कियों और लड़कों सहित 41 लोग मौजूद थे, जो देश भर के लोगों को फोन कर फर्जी फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश के लिए फुसला रहे थे। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए वहां मौजूद सभी डिजिटल उपकरणों को जब्त कर लिया और गिरोह के सरगनाओं को दबोच लिया।

पूछताछ के दौरान मुख्य मास्टरमाइंड कार्तिक अग्रवाल ने बताया कि वह पहले ब्रोकरेज और वैध ट्रेडिंग फर्मों में काम कर चुका था, जहां से उसने इस काम के सारे गुर सीखे। उसने टेलीग्राम के माध्यम से मेटा कोटीज नाम का एक फर्जी ट्रेडिंग एप्लिकेशन और लिंक तैयार करवाया। इस ऐप के डैशबोर्ड पर वे अपनी मर्जी से किसी का भी घाटा या मुनाफा दिखा सकते थे। इसके बाद वे इंडियामार्ट और टेलीग्राम चैनलों से संभावित निवेशकों का डेटा खरीदते थे और टेली-कॉलर्स के जरिए उन्हें झांसा देकर पैसे ऐंठते थे। ठगी की इस रकम को पुलिस की नजरों से बचाने के लिए वे गरीब मजदूरों के नाम पर करीब 40 म्यूल बैंक खाते और सिम कार्ड किराए पर लेते थे। पैसों को पूरी तरह ठिकाने लगाने के लिए वे गोल्ड लोन के रीपेमेंट और टॉप-अप मैकेनिज्म का इस्तेमाल करते थे ताकि मनी ट्रेल को छुपाया जा सके।

पुलिस ने मौके से 10 चेक बुक, 2 पासपोर्ट, 4 डेबिट कार्ड, 100 यूएस डॉलर, 1820 थाईलैंड भात और 90 दिरहम भी जब्त किए हैं। दिल्ली पुलिस अब इस गिरोह के सभी बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया पूरी कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि देश भर में इस सिंडिकेट ने और कितने लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाया है।

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