दिलशाद कॉलोनी रेड लाइट के पास हुए हत्याकांड का कुछ ही घंटों में खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार, हत्या में इस्तेमाल चाकू और डंडा बरामद

नई दिल्ली: दिल्ली के शाहदरा जिले की सीमापुरी थाना पुलिस टीम ने तत्परता और पेशेवर कार्यशैली का परिचय देते हुए दिलशाद कॉलोनी इलाके में हुई एक युवक की निर्मम हत्या के मामले को कुछ ही घंटों के भीतर सुलझा लिया है। पुलिस ने इस अमानवीय वारदात को अंजाम देने वाले तीनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सोनू (20 वर्ष) निवासी डीएलएफ भोपुरा (उत्तर प्रदेश), लक्ष्मी नारायण (32 वर्ष) निवासी नंद नगरी (दिल्ली) और मोहम्मद अमान उर्फ शाहिद (22 वर्ष) निवासी सुंदर नगरी (दिल्ली) के रूप में हुई है। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपियों के कब्जे से हत्या में इस्तेमाल किया गया धारदार चाकू और डंडा भी बरामद कर लिया है। इस त्वरित पुलिसिया कार्रवाई से इलाके में कानून-व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास मजबूत हुआ है।

शाहदरा जिले के डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया कि 16 मई की रात करीब 11 बजे सीमापुरी थाने को सूचना मिली कि दिलशाद कॉलोनी रेड लाइट के पास एक अज्ञात घायल व्यक्ति लहूलुहान हालत में पड़ा हुआ है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत सक्रिय हुई, हालांकि तब तक एक राहगीर द्वारा घायल को इलाज के लिए जीटीबी अस्पताल ले जाया जा चुका था। इसके बाद, 17 मई की रात करीब 12:55 बजे जीटीबी अस्पताल से जानकारी मिली कि डॉक्टरों ने उस अज्ञात घायल व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया है। वारदात की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भारी पुलिस बल और क्राइम टीम के साथ तुरंत अस्पताल और घटनास्थल पर पहुंचे।

घटनस्थल और आसपास की गई शुरुआती जांच के दौरान पुलिस टीम को गौरव नाम का एक प्रत्यक्षदर्शी मिला, जो नंद नगरी का रहने वाला था। गौरव ने मृतक की पहचान अपने दोस्त जीशान के रूप में की, जो ताहिरपुर, दिल्ली का निवासी था। प्रत्यक्षदर्शी गौरव ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि वह और उसका दोस्त जीशान दोनों एक साथ दिलशाद कॉलोनी रेड लाइट के पास सर्विस लेन से जा रहे थे, तभी अचानक एक स्कूटी पर सवार होकर तीन लोग (सोनू, लक्ष्मी नारायण और मोहम्मद अमान उर्फ शाहिद) वहां पहुंचे। वे तीनों पहले से ही जीशान को जानते थे और वहां आते ही एक पुराने विवाद को लेकर जीशान के साथ झगड़ा और गाली-गलौज करने लगे।

जब प्रत्यक्षदर्शी गौरव ने इस झगड़े का विरोध किया और बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उसे अंजाम भुगतने की धमकी दी और कहा कि वे बीच में न आए क्योंकि वे जीशान को सबक सिखाना चाहते हैं। बहसबाजी के दौरान ही अचानक आरोपी मोहम्मद अमान उर्फ शाहिद ने जीशान को कसकर पकड़ लिया, जबकि दूसरे आरोपी सोनू ने अपने पास से एक धारदार चाकू निकाला और जीशान के सीने पर जोरदार वार कर दिया। इसी बीच तीसरे आरोपी लक्ष्मी नारायण ने जीशान पर डंडे से भी हमला कर दिया। जीशान को लहूलुहान हालत में जमीन पर गिरता देख तीनों आरोपी अपनी स्कूटी पर सवार होकर मौके से फरार हो गए।

इस वारदात के संबंध में पीसीआर कॉल, अस्पताल की एमएलसी और प्रत्यक्षदर्शी गौरव के बयान के आधार पर सीमापुरी थाने में बीएनएस की धारा 103(1)/3(5) के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू की गई। मामले को सुलझाने और आरोपियों की धरपकड़ के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के सीधे पर्यवेक्षण में सीमापुरी पुलिस की कई विशेष टीमें गठित की गईं। पुलिस टीमों ने स्थानीय खुफिया तंत्र, तकनीकी इनपुट्स और सर्विलांस का सहारा लिया और दिल्ली व यूपी में आरोपियों के संभावित छिपने के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की।

पुलिस टीम की कड़ी मेहनत और त्वरित कार्रवाई के चलते वारदात के महज कुछ ही घंटों के भीतर तीनों आरोपियों को ढूंढ निकाला गया और उन्हें सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के बाद पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया खून से सना चाकू और डंडा बरामद कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों में सोनू पेशे से मजदूर है, लक्ष्मी नारायण फुटपाथ पर जूते बेचने का काम करता है और मोहम्मद अमान एक सैलून में दैनिक मजदूरी पर काम करता है। पुलिस अब आरोपियों को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है ताकि मर्डर के पीछे की पूरी वजह और उनके पुराने विवाद की गहनता से पड़ताल की जा सके। मामले की आगे की जांच जारी है।

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