मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की युवा को नसीहत, विवेकानंद की तरह चरित्र बनाएं, सिर्फ डिग्री से देश नहीं बनता

राष्ट्रीय जजमेंट

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने हाल ही में दो अलग-अलग कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण संदेश दिए। भिवानी के चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उन्होंने छात्रों को देश का भविष्य बताते हुए उन्हें मजबूत चरित्र और जिम्मेदारी सिखाने पर जोर दिया। वहीं, जयपुर में ‘एसोसिएशन ऑफ रिटायर्ड जजेज’ के कार्यक्रम में उन्होंने न्यायपालिका पर जनता के भरोसे और पूर्व न्यायाधीशों के अनुभव की महत्ता पर बात की।
छात्रों के लिए खास संदेशभिवानी में छात्रों को संबोधित करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि केवल अकादमिक डिग्रियां ही सफलता का रास्ता नहीं होतीं। उन्होंने कहा, “सफलता अनुशासन, मेहनत, समय का सही उपयोग और हमेशा नया सीखने की इच्छा से मिलती है।” उन्होंने शिक्षा का व्यापक उद्देश्य बताते हुए कहा कि इसका मतलब सिर्फ रोजगार पाना नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और अच्छे नैतिक मूल्य विकसित करना होना चाहिए। उन्होंने छात्रों को स्वामी विवेकानंद और नेल्सन मंडेला जैसे महापुरुषों से प्रेरणा लेकर देश और समाज के विकास में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।जयपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि न्यायपालिका और उससे जुड़ी संस्थाओं में जनता का बहुत गहरा विश्वास है। इस विश्वास को बनाए रखना हर किसी की जिम्मेदारी है। उन्होंने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की तुलना राजस्थान की ‘बावड़ियों’ से की। उन्होंने कहा कि जिस तरह बावड़ियां सूखे के समय पानी का काम आती हैं, उसी तरह पूर्व न्यायाधीशों का अनुभव आज भी बहुत कीमती है। उनका ज्ञान लोक अदालतों और मध्यस्थता जैसे कामों में समाज के लिए एक बहुमूल्य संसाधन की तरह है।

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