दिल्ली पुलिस का ‘मिशन सेफ रिटर्न’ सफल: AHTU टीम ने 5 दिनों में 34 लापता बच्चों और व्यक्तियों को परिवार से मिलाया

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस के बाहरी जिला की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने ‘मिशन सेफ रिटर्न’ के तहत एक विशेष मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए मात्र पांच दिनों के भीतर 34 लापता बच्चों और व्यक्तियों को सुरक्षित ढूंढ निकालने में बड़ी सफलता प्राप्त की है। पुलिस की इस समर्पित टीम ने 31 मार्च से शुरू हुए इस विशेष अभियान के दौरान दिल्ली के विभिन्न कोनों से 34 गुमशुदा/अपहृत व्यक्तियों को दस्तयाब किया है, जिनमें से अधिकांश नाबालिग थे। त्वरित कार्रवाई और संवेदनशीलता के कारण इन सभी पीड़ितों को उनके परिजनों से मिलाया गया है, जिनमें से अधिकतर लोग मामूली पारिवारिक विवादों या आपसी मनमुटाव के चलते घर छोड़कर चले गए थे।

बाहरी जिले के डीसीपी विक्रम सिंह ने बताया कि लापता व्यक्तियों, विशेषकर नाबालिगों से जुड़े मामलों की संवेदनशीलता को देखते हुए एएचटीयू को एक केंद्रित कार्रवाई की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। डीसीपी ने बताया कि 31 मार्च से शुरू हुए इस पांच दिवसीय विशेष अभियान की सीधी निगरानी उनके द्वारा स्वयं की गई। एसीपी वीरेंद्र दलाल के नेतृत्व में एसआई सुनील कुमार, एएसआई संजीव, जग प्रवेश, महेंद्र सिंह और महिला कांस्टेबल रिंकी की एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने मिशन मोड में काम करते हुए दिन-रात एक कर दिया।

अभियान के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी देते हुए डीसीपी ने बताया कि टीम ने पीड़ितों के माता-पिता, अभिभावकों, पड़ोसियों और दोस्तों से गहन पूछताछ कर जानकारी जुटाई। पुलिस ने केवल पारंपरिक मुखबिर तंत्र का ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीकी सर्विलांस और डेटा विश्लेषण का भी सहारा लिया ताकि पीड़ितों के मूवमेंट पैटर्न का पता लगाया जा सके। डीसीपी ने बताया कि टीम की पेशेवर मुस्तैदी और निरंतर प्रयासों के कारण ही दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों से इन 34 लोगों को सुरक्षित ढूंढना संभव हो पाया।

डीसीपी ने आगे बताया कि जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि समय पर हस्तक्षेप न होने पर ऐसे लापता बच्चे मानव तस्करी का शिकार हो सकते थे, लेकिन टीम की सतर्कता ने इसे नाकाम कर दिया। बरामद किए गए सभी व्यक्तियों को संबंधित थानों के जांच अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया गया है, जो अब नियमानुसार आगे की कानूनी प्रक्रिया और काउंसलिंग पूरी कर रहे हैं। इस सफल ऑपरेशन ने न केवल पुलिस की छवि को बेहतर बनाया है, बल्कि सामुदायिक कल्याण और सार्वजनिक सुरक्षा के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता को भी दोहराया है।

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