दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन: पाक-ISI समर्थित टेरर मॉड्यूल के दो मुख्य गुर्गे गिरफ्तार, अत्याधुनिक हथियार और गुप्त कैविटी वाली कार बरामद

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने देश की सुरक्षा को चुनौती देने वाले एक बड़े अंतर्राष्ट्रीय हथियार तस्करी और टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए इसके दो मुख्य गुर्गों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने बुलंदशहर निवासी आरोपी इमरान (37 वर्ष) और मोहम्मद कामरान (27 वर्ष) को आईजीआई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया है, जिनके कब्जे से दो अत्याधुनिक हथियार (0.30 बोर चाइनीज पिस्तौल और 0.32 बोर रिवॉल्वर), 11 जिंदा कारतूस और तस्करी के लिए विशेष रूप से बनाई गई गुप्त कैविटी वाली मारुति स्विफ्ट कार बरामद की गई है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI द्वारा समर्थित यह मॉड्यूल नेपाल के रास्ते भारत में हथियारों की खेप भेजकर आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग जुटा रहा था; इस मामले में अब तक 12 आरोपियों की गिरफ्तारी और 23 विदेशी हथियारों की बरामदगी हो चुकी है।

क्राइम ब्रांच के डीसीपी संजीव कुमार यादव ने बताया कि एसीपी संजय कुमार नागपाल के नेतृत्व में इंस्पेक्टर मान सिंह और सुंदर गौतम की टीम ने एक गुप्त सूचना और पूर्व में दर्ज एफआईआर की जांच को आगे बढ़ाते हुए इन दोनों आरोपियों को आईजीआई एयरपोर्ट पर दबोचा। इनके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया गया था, जिसके आधार पर एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इन्हें हिरासत में लिया। डीसीपी ने बताया कि ये दोनों आरोपी अंतर्राष्ट्रीय हथियार तस्कर शाहबाज अंसारी के सक्रिय सदस्य हैं और नेपाल के रास्ते भारत में हथियारों की खेप पहुंचाते थे। मामले की गंभीरता और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की सीधी संलिप्तता के प्रमाण मिलने पर पुलिस ने इस केस में UAPA की सख्त धाराएं लगाई हैं।

जांच के दौरान पकड़े गए आरोपियों ने खुलासा किया कि वे शाहबाज अंसारी के निर्देश पर नेपाल जाते थे और वहां से अत्याधुनिक हथियारों की खेप प्राप्त करते थे। पुलिस पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे पकड़े जाने के डर से हथियारों को हिस्सों में अलग कर देते थे और भारत की सीमा में दाखिल होने के बाद उन्हें दोबारा जोड़ते थे। डीसीपी ने बताया कि आरोपियों ने तस्करी के लिए अपनी मारुति स्विफ्ट कार में विशेष रूप से गुप्त खाने बनवाए थे, जो सामान्य तलाशी के दौरान पुलिस की नजरों में नहीं आते थे। इसी कार के जरिए वे दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के अपराधियों तथा राष्ट्रविरोधी तत्वों को हथियारों की सप्लाई कर रहे थे।

पुलिस ने बताया कि इस पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड शाहबाज अंसारी है, जो पाकिस्तान और नेपाल में बैठे अपने आकाओं के संपर्क में रहता था। इस नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य भारत की आंतरिक सुरक्षा को नुकसान पहुँचाना और आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग जुटाना था। डीसीपी ने बताया कि हथियार बेचकर जो पैसा इकट्ठा होता था, उसे राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में खर्च किया जाना था। अब तक इस मॉड्यूल से कुल 23 विदेशी हथियार और 211 जिंदा कारतूस बरामद किए जा चुके हैं। फिलहाल पुलिस की टीमें फरार आरोपियों और इस नेटवर्क के अन्य मददगारों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं।

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