कोचिंग मे सीताजी को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करने वाले विकास दिव्यकीर्ति विवादों के घेरे मे

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राष्ट्रीय जजमेंट न्यूज़

संवाददाता

देश भर में कोचिंग गुरु डॉ विकास दिव्यकीर्ति के विवादित वीडियो क्लिप को लेकर घमासान छिड़ा हुआ है। सोशल मीडिया पर एक ओर से लोग उन्हें हिंदू विरोधी बताकर भगवान श्रीराम और देवी सीता के अपमान का आरोप लगा रहे हैं, वहीं, दूसरी ओर कुछ लोग उनका समर्थन भी कर रहे हैं। विवादित वीडियो क्लिप में दिव्यकीर्ति रामायण की चौपाइयों का संदर्भ देते हुए  इसके अलावा एक और वीडियो क्लिप में शम्बूक वध का हवाला देते हुए कथित तौर पर भगवान पर जातिगत भेदभाव और दलित विरोधी होने का आरोप लगाने की चेष्टा की गई है।

डॉ विकास दिव्यकीर्ति कोचिंग में पढ़ाने के दौरान देवी सीता के संबंध में विवादित टिप्पणी करने का सोशल मीडिया पर 45 सेकंड का वीडियो सामने आने के बाद सवालों के घेरे में है। दिव्यकीर्ति के वीडियो को लेकर हिंदू समाज में रोष व्याप्त है। इसे लेकर लोग सड़कों तक पर विरोध जता रहे हैं। साथ ही दृष्टि आईएएस कोचिंग को बंद करने और उन्हें ईशनिंदा के आरोप में गिरफ्तार करने की मांग कर रहे हैं।

ट्विटर पर भी यह मुद्दा लगातार ट्रेंड में बना हुआ है।

संचालक विकास दिव्यकीर्ति ने बताया कि जो वीडियो वायरल हो रहा है वह यूपीएससी के पूर्व सदस्य, जेएनयू प्रोफेसर व लेखक पुरुषोत्तम अग्रवाल की पुस्तक संस्कृति : वर्चस्व एवं प्रतिरोध के रेफरेंस पर चर्चा के दौरान का है। दिव्यकीर्ति का कहना है कि उन्होंने खुद से कोई टिप्पणी नहीं की, टिप्पणी वाल्मिकी लिखित उत्तर रामायण के श्लोक को लेकर लेखक पुरुषोत्तम अग्रवाल की पुस्तक की गई है। इसी का उन्होंने अपने क्लास के दौरान रेफरेंस दिया था और उसकी एक छोटी सी क्लिप वायरल हो रही है। यह वीडियो भी 2018 का है।

विकास दिव्यकीर्ति ने अपने सफाई में वाल्मिकी रामायण और तुलसीदास कृत रामचरितमानस के कथित संदर्भ भी बताए हैं। उनका दावा है कि यह उत्तर रामायण का प्रसंग है। उन्होंने कहा कि जेएनयू प्रोफेसर व लेखक पुरुषोत्तम अग्रवाल की संस्कृति : वर्चस्व एवं प्रतिरोध, में पेज 66 और 67 पर ऐसा कहा गया है। सीता के परित्याग वाली बात के संदर्भ में गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित महाभारत के द्वितीय खंड में पृष्ठ संख्या 218 और 219 का संदर्भ भी दिया है। श्लोक संख्या 13 का संदर्भ देते हुए लेखक अग्रवाल ने पुस्तक में टिप्पणी की है। इसी के संदर्भ से उन्होंने कक्षा में पढ़ाया था।

अपमानजनक तरीके से समझाना भी विरोध का कारण
वीडियो में डॉ विकास दिव्यकीर्ति हंसते हुए देवी सीता पर अमर्यादित एवं अपमानजनक टिप्पणी कर रहे हैं। हालांकि, वे कथित तौर पर पुस्तक का संदर्भ दे रहे हैं, लेकिन उनकी कक्षा में मौजूद छात्र भी ठहाका मारकर हंस रहे हैं। इस अपमानजनक रवैये से लोगों की आस्था को ठेस पहुंची है। हिंदू समाज के लिए भगवान श्रीराम एवं देवी सीता आस्था के केंद्र हैं और रामायण एक पवित्र और पूजनीय ग्रंथ है।

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