उत्तर प्रदेश : गौशालाओं की स्थिति बेहद खराब, भूख प्यास से तड़प-तड़प कर मर रहे मवेशी

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उत्तर प्रदेश में गौशालाओं की स्थिति बेहद खराब है। दो दिन पहले हमीरपुर की गौशाला में 5 फीट तक पानी भर गया। लाखों की लागत से बनी गौशाला पानी में डूब गई। कई गायों ने दम तोड़ दिया तो कुछ निकलकर सड़क पर आ गईं और बेसहारा हालत में घूम रही हैं।

सिर्फ हमीरपुर ही नहीं, बाकी जिलों की गौशालाओं का हाल भी कुछ ऐसा ही है। कहीं गायों के लिए चारा-पानी की व्यवस्था नहीं है तो कहीं छत नहीं है, जिससे धूप और बारिश में उनकी दुर्दशा हो रही है। कई गौशालाओं में तो भूख से गायों के तड़प-तड़पकर दम तोड़ने के भी मामले सामने आए हैं। दैनिक भास्कर ने यूपी के 8 जिलों में हकीकत जानी तो गौशालाओं और गायों, दोनों का बुरा हाल दिखा। आप भी देखिए किस हाल में हैं गायें।

हमीरपुर के गोहांड ब्लॉक के रिहुंटा ग्राम पंचायत में सोमवार को गौशाला में पांच फीट तक पानी भर गया। टीनशेड और भूसा घर भी पानी से लबालब हो गए। ग्रामीणों ने बताया कि गौशाला में बंद अन्ना गाएं पानी में भीगी एक कोने में बैठी रहती हैं। पानी भरा होने के कारण उनके लिए भूसा और चारा के भी इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। गौशाला के नोडल अधिकारी विनीत पांडेय ने अपनी टीम के साथ गौशाला का निरीक्षण करने पहुंचे थे जहां उन्होंने गौशाला में बीमार गौवंश और मृतक गौंवंश की जानकारी ली। 4 बीमार गौंवंश मिले।

ललितपुर के महरौनी की ग्राम पंचायत सौजना स्थित गौशाला आसरा स्थल में दिसंबर 2020 में भूख-प्यास से एक दर्जन गायों के मरने की तस्वीर सामने आने के बाद प्रियंका गांधी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी। स्थिति तब से अभी भी वैसी ही है। ग्राम पंचायत अधिकारी दीपक विश्कर्मा ने बताया कि सौजना स्थित गौवंश संरक्षण केंद्र में वर्तमान में 1107 गौवंश है। वहीं, ग्राम दैलवारा स्थित कान्हा पशु आश्रय स्थल के प्रभारी अभिषेक बताते हैं कि पशु आश्रय स्थल में 658 गौवंश हैं।

Uttar Pradesh: The condition of cowsheds is very bad, cattle are dying of hunger and thirst.

इटावा जनपद में 36 गौशाला संचालित हैं। 2019 की गणना के अनुसार, जनपद में अब तक 150 गौवंशों की मौत का आंकड़ा पशु पालन विभाग बता रहा है जबकि हकीकत में यह आंकड़ा हजारों में पहुंच चुका है। जनपद में गौशालाओं में और सड़क पर घूम रहे गौवंशों की संख्या 104777 है, जिनमें से 804 गौवंश मुख्यमंत्री की योजना के तहत गौवंशों को पालने के लिए ले जा चुके है।

नवादा रोड की गौशाला में बरसात के मौसम में गौवंश बाहर बंधे हैं। हालांकि केयर टेकर का कहना है कि बारिश आने से पहले टीन शेड के नीचे सभी को बांध दिया जाता है। लेकिन टीन शेड भी मात्र 100 से 125 गौवंश के हिसाब से बनाई गई है। एक के ऊपर एक गौवंशों को बांधा जा रहा है। जबकि अग्रवाल धर्मशाला में बनी गौशाला में भी स्थिति यही है। निकासी के लिए नालियां तो बनी है। लेकिन गौवंश जहां पर खड़े होते हैं, वहां पर गंदगी का अंबार है।

Uttar Pradesh: The condition of cowsheds is very bad, cattle are dying of hunger and thirst.
                                                                                      गंदगी और पानी के बीच बैठे मवेशी

महराजगंज में मधवलिया गौसदन है। इस गौसदन में मौजूदा समय में करीब 1500 पशु हैं। वर्ष 2019 से पहले इस गौसदन में इतनी अव्यवस्था थी कि प्रतिदिन भूख और इलाज के अभाव में गौवंशीय पशुओं के मरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा था। गोसदन में उस बीच तीन दिनों के भीतर मरने वाले गोवंशीय पशुओं की संख्या 30 हो गई। अव्यवस्था अभी कम हुई है। हालात सुधरे जरूर हैं पर बारिश के मौसम में गायों की दुर्दशा हो रही है। चारा-पानी की भी दिक्कत है।

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