राम मंदिर पर हिंदुओं का सब्र टूट रहा है, मुझे भय है कि टूटा तो क्‍या होगा: गिरीराज सिंह

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राम मंदिर मुद्दे पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान गिरिराज सिंह ने एक टीवी चैनल से बातचीत में यह कहा, ‘देश का दुर्भाग्य है कि हिंदुओं को प्रताड़ित होना पड़ा, आजादी के तुंरत बाद ही। हिंदू-मुस्लिम करके देश का बंटवारा हुआ।
हिंदुओं की आस्था का केंद्र राम मंदिर बन गया होता तो आज यह दूर्दशा नहीं होती। मगर नेहरू ने वोट की खातिर इसे विवादित बनाकर रख दिया।’
राम मंदिर मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री गिरीराज सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘अब हिंदुओं का सब्र टूट रहा है। मुझे भय है कि सब्र टूटा तो क्या होगा।’ उन्होंने सोमवार (29 अक्टूबर, 2018) को ट्वीट कर कहा कि हिंदुस्तान का दुर्भाग्य है कि
1947 के बाद हिंदुओं को प्रताड़ित किया गया। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू धर्म के आधार पर हिंदुस्तान के बंटवारे के बाद राम मंदिर बना सकते थे।

मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया और वोट की खातिर इस मुद्दे को विवादित बना दिया। ट्वीट में सिंह ने आगे कहा कि अब ‘हिंदुओं का सब्र टूट’ रहा है।
मंदिर निर्माण मुद्दे पर उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता कपिल सिब्बल पर भी निशाना साधा। मोदी सरकार में केंद्रीय में मंत्री ने कहा, ‘कपिल सिब्बल कह रहे हैं कि अभी इस मुद्दे पर मत बोले, क्योंकि चुनाव हैं।
कांग्रेस तो चाहती है कि मंदिर ना बने और यह मुद्दा विवादित बना रहे। इसी पर कांग्रेस वोट हासिल करती रहे।’ इसके अलावा गिरिराज ने कड़े शब्दों में कहा कि
मंदिर निर्माण के लिए अब हिंदू इंतजार नहीं कर सकते हैं। इंतजार बहुत हो गया। अब सब्र की सीमा टूट रही है। अगर सब्र की सीमा टूट गई तो बहुत कुछ भी हो सकता है।

बता दें कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि मालिकाना हक विवाद मामले में दायर दीवानी अपीलों को जनवरी, 2019 में एक उचित पीठ के सामने सूचीबद्ध किया जाएगा।
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसफ की पीठ ने यह बात कही।
भूमि विवाद मामले में दीवानी अपील इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर की गई है। उचित पीठ मामले में अपील पर सुनवाई की तारीख तय करेगी।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम जनवरी में उचित पीठ के सामने अयोध्या विवाद मामले की सुनवाई की तारीख तय करेंगे।’’ इससे पहले तीन न्यायाधीशों की एक पीठ ने 2:1 के बहुमत से 1994 के अपने फैसले में
यह भी पढ़ें: अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में थोड़ी देर में शुरू होगी सुनवाई
मस्जिद को इस्लाम का अभिन्न हिस्सा ना मानने संबंधी टिप्पणी पर पुर्निवचार का मुद्दा पांच सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेजने से इनकार कर दिया था।
अयोध्या भूमि विवाद मामले की सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठा था।

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