अगले विश्वकप में खेलने का युवराज सिंह का सपना शायद रह जाएगा अधूरा

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नई दिल्ली, । कुछ दिन पहले ही युवराज सिंह ने कहा था कि वो 2019 तक क्रिकेट खेलते रहेंगे। भारतीय टीम में वापसी के लिए प्रयासरत युवी का ये भी कहना था कि

 

टीम में उनका चयन सेलेक्टर्स के हाथों में है। वो अपनी तरफ से कड़ी मेहनत करते रहेंगे पर अब जो हुआ उससे यही संकेत मिल रहे हैं कि उनका अगले विश्व कप में खेलने का सपना अधूरा रह सकता है। 
अगले विश्व कप के लिए सभी क्रिकेट बोर्ड आइसीसी को संभावित तीस सदस्यों की सूची देंगे लेकिन इसमें युवराज सिंह का नाम आना मुश्किल लग रहा है।
ऐसा इसलिए है क्योंकि मंगलवार से शुरू हो रही देवधर ट्रॉफी में भारत की ए, बी और सी टीमें खेल रही हैं और बीसीसीआइ ने इसके लिए तीन टीमों में 45 खिलाड़ियों का चयन किया है। इन तीनों ही टीम में युवराज सिंह को शामिल नहीं किया गया है। 
देवधर ट्रॉफी में सुरेश रैना और आर अश्विन खेलेंगे तो विजय हजारे ट्रॉफी में अच्छा प्रदर्शन करने वाले गौतम गंभीर को उनकी अच्छी बल्लेबाजी के लिए देवधर ट्रॉफी की टीम में चुन लिया गया लेकिन
युवी को किसी भी टीम में जगह नहीं दी गई। इससे यही संकेत मिलते हैं कि युवी के लिए अगले विश्व कप रास्ता फिलहाल तो बंद ही दिख रहा है।
जब युवी घरेलू वनडे टूर्नामेंट में ही नहीं खेलेंगे तो उन्हें सीधा विश्व कप से लिए भारतीय टीम में शामिल करना काफी मुश्किल ही लग रहा है।
देवधर ट्रॉफी में कई ऐसे खिलाड़ियों को मौका मिला है जिनका नाम नया है लेकिन युवी को जगह नहीं मिली। इसका साथ मतलब ये है कि उन्हें लगभग 2019 विश्व कप की टीम से बाहर कर दिया गया है। 
युवी 2019 विश्व कप में खेलने की इच्छा रखते हैं वो इससे जाहिर हो गया था जब उन्होंने साफ कर दिया था कि वो 2019 तक क्रिकेट खेेलेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि
मेरी जरुरत होगी तब मैं घरेलू क्रिकेट खेलूंगा लेकिन उन्हें देवधर ट्रॉफी की टीम में शामिल नहीं करना कुछ और ही बात की तरफ इशारा कर रहा है। 
आपको बता दें कि भारत ने टी 20 विश्व कप 2007 में जीता था और इसके बाद 2011 में क्रिकेट विश्व कप का खिताब टीम इंडिया ने 
क्रिकेट विश्व कप का खिताब टीम इंडिया ने अपने नाम किया था। इन दोनों मौकों पर युवराज का प्रदर्शन बेहतरीन रहा था और उनकी भूमिका काफी अहम रही थी।
 2007 में दक्षिण अफ्रीका में हुए विश्वकप के दौरान युवराज सिंह ने अपने बल्ले से जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 6 मैचों में 148 रन बनाए जिसमें दो अर्धशतक शामिल थे।
इंग्लैंड के खिलाफ 12 गेंद में अर्धशतक के अलावा उन्होंने लगातार 6 गेंदों पर छह छक्के जड़े थे। वहीं भारत में खेले गए 2011 विश्वकप में उन्होंने 9 मैचों में 362 रन बनाए।
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इस दौरान उन्होंने 4 अर्धशतक और एक शतक भी जमाया। गेंदबाजी में उन्होंने 15 विकेट झटके और मैन ऑफ द टूर्नामेंट चुने गए।

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