तिरुपति बालाजी मंदिर में लोगों की आस्था के साथ हो रहा है खिलवाड़

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भारत और म्यांमार सीमा पर दो महीने पहले पकड़े गए मुंडन के बालों की खेप के मुद्दे ने आंध्र प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है.आशंका है कि ये बाल तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) से तस्करी किए जा रहे थे. ये मंदिर लोगों की भावनाओं से भी जुड़ा है.अब बालों की तस्करी को लेकर श्रद्धालुओं में भी चर्चा होने लगी है. पकड़े गए बालों की क़ीमत करीब 1.8 करोड़ रुपये आंकी गई है

सवाल पूछा जा रहा है कि तस्करी का पता चलने के बाद अधिकारियों ने क्या किया? सवाल ये भी है कि तिरुमला में कुछ सोशल मीडिया अकाउंट और एक टीवी चैनल के ख़िलाफ़ मुक़दमा क्यों दर्ज किया गया है?मुंडन के ये बाल दो महीने पहले पकड़े गए थे असम राइफल्स की एक सर्च पार्टी ने बालों की ये खेप मिजोरम से लगी म्यांमार सीमा पर पकड़ी थी लेकिन इस पर चर्चा अब ज्यादा हो रही है.आमतौर पर इस इलाक़े में सोने और जंगली जानवरों की तस्करी की जा जाती है. लेकिन पहली बार सुरक्षाबलों को इंसान के बालों से भरी 120 बोरियां मिली थी हर बोरी में करीब पचास किलो बाल थे इसकी बरामदगी को लेकर विवाद भी हुआ

बीस मार्च को जारी किए गए एक अधिकारिक बयान में ये कहा गया है कि सुरक्षाबलों ने बालों की ये खेप एक ट्रक से पकड़ी थी.कुछ अधिकारियों ने मीडिया को बताया था कि ट्रक चला रहे ड्राइवरों ने दावा किया था कि ये बाल तिरुपति से लाए जा रहे थे.अधिकारियों के मुताबिक ड्राइवर ने कहा था कि उसे एज़वाल की एक मारूयति नाम की महिला ने तिरुपति से बाल लाने का ठेका दिया था

अंग्रेज़ी अख़बार हिंदू की एक रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से भी कहा गया था कि ट्रकों से देश के कई मंदिरों से बाल लाए जाने थे, लेकिन जो ट्रक जब्त किया गया था उसमें तिरुपति से लाए गए बाल थे.ट्रक के ड्राइवर मुंगयान सिंह से पुलिस ने कड़ी पूछताछ की थी. ये ट्रक भारतीय सीमा के 7 किलोमीटर भीतर पकड़ा गया था अधिकारियों का कहना था कि ट्रक से जब्त बालों की कीमत 1.8 करोड़ रुपये तक हो सकती है

भारत से ये बाल तस्करी करके म्यांमार ले जाए जाते हैं. फिर ये थाईलैंड पहुंचते हैं जहां इन्हें तैयार करके चीन भेज दिया जाता है.अधिकारियों के मुताबिक चीन में इन बालों के विग बनाए जाते हैं और फिर इन्हें दुनिया भर के बाज़ारों में भेजा जाता है.बाज़ार पर नज़र रखने वाले विश्लेषकों के मुताबिक विग बनाने के 70 फ़ीसदी कारोबार पर चीन का क़ब्ज़ा है. सिर के बालों का बाज़ार दुनिया भर में हैं

ख़ासकर भारत में कुछ मंदिरों में बाल चढ़ाए जाने की प्रथा है. इस वजह से यहां बाल आसानी से उपलब्ध रहते हैं  विग कारोबार के लिए कच्चा माल भारत से ही जाता है.भारत में सिर के बाल सबसे ज्यादा तिरुपति मंदिर में ही दान किए जाते हैं

यहां रोज़ाना औसतन पचास हज़ार श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं.इनमें से कम से कम एक तिहाई यहां अपने बालों का दान करते हैं.वित्तीय वर्ष 2020-21 में टीटीडी को बालों से 131 करोड़ रुपये की आय हुई  टीटीडी का सालाना बजट क़रीब तीन हज़ार करोड़ रुपये का रहता है.आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक टीटीडी को टिकटों की बिक्री के अलावा मुंडन के बालों की बिक्री से भी अच्छी आय होती है

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