डेंगू और वायरल फीवर ने पूरे फिरोजाबाद को हिला डाला, मृतकों की संख्या 151

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राष्ट्रीय जजमेंट न्यूज़- फिरोजाबाद 

फिरोजाबाद जिले में हालात सुधर नहीं रहे हैं। सोमवार को डेंगू और वायरल फीवर से 11 मरीजों की मौत हो गई। इनमें नौ बच्चे हैं। इससे पूर्व रविवार को पांच बच्चों ने दम तोड़ दिया था। जिले में अब मृतकों की संख्या 151 पर पहुंच गई है। मौत के आंकड़े के साथ मरीजों की संख्या बढ़ रही है। 24 घंटे में कराई गई एलाइजा जांच में 167 बच्चों में डेंगू की पुष्टि हुई है। राजकीय मेडिकल कॉलेज स्थित सौ शैय्या अस्पताल में मरीजों की संख्या एक बार फिर से 450 के पार पहुंच गई है।

निजी चिकित्सकों के मोहल्ला क्लीनिक बंद होने से अब निजी और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर लोड बढ़ गया है। सोमवार को सौ शैय्या अस्पताल के बाहर मरीज और तीमारदारों की भीड़ नजर आई। मरीजों को इलाज के लिए भी मुश्किलों को सामना करना पड़ रहा है। एक पलंग पर दो मरीजों का इलाज चल रहा है।

फिरोजाबाद के भीमनगर निवासी विकास अपने 7 माह के पुत्र निखिल कुमार को बुखार आने पर सौ शैय्या अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां जांच के बाद चिकित्सक ने निखिल को मृत घोषित कर दिया। मालवीय नगर निवासी आकाश (11 वर्ष) पुत्र पप्पू और सुकन्या (2 माह) पुत्री रामबिहारी निवासी आजाद नगर की भी सौ शैय्या अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई।

हिमांयूपुर की आराध्या (05 वर्ष) को गंभीर हालत में परिजन सौ शैय्या अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। गढ़ी तिवारी निवासी अंशू (01 वर्ष) पुत्र जयप्रकाश और सरस्वती नगर निवासी वैष्णवी (11 वर्ष) पुत्री नेत्रपाल ने सोमवार को उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। वैष्णवी की मौत के बाद उसकी बहन निकिता निरीक्षण के लिए सौ शैय्या अस्पताल पहुंचे मंडलायुक्त अमित गुप्ता की गाड़ी के आगे लेट गई। इस दौरान काफी देर तक हंगामा होता रहा।

ठारफूटा निवासी अनामिका (20 वर्ष) पुत्री चंद्रभान सिंह, यमुना नगर निवासी सुरभि (07 वर्ष) पुत्री लोकेश, नगला करन सिंह निवासी उमाभारती (11 वर्ष) पुत्री सुरेंद्र कुमार, सुहाग नगर निवासी दिव्यांशी (13 वर्ष) पुत्री प्रयाग सिंह, दिकतौली निवासी अंजू (20 वर्ष) पत्नी मैसिक की मौत निजी अस्पताल में उपचार के दौरान हो गई। सभी को चार दिन से बुखार आ रहा था। प्लेटलेट्स 30 हजार से नीचे पहुंच गया था।

सौ शैय्या अस्पताल में 24 घंटे में 168 से अधिक मरीजों को भर्ती किया गया है। संसाधनों के अभाव में मरीजों और तीमारदारों को परेशानी हुई। मरीजों को दिखाने के लिए कई-कई घंटे इंतजार करना पड़ा। खाली पलंग के लिए मरीज पहली मंजिल से तीसरी मंजिल और नई बिल्डिंग के पहली और दूसरी मंजिल पर दौड़ लगाते नजर आए। मेडिकल कॉलेज के आंकड़ों के मुताबिक डेंगू से पीड़ित 32 बच्चों को ठीक होने के बाद डिस्चार्ज किया गया।

निजी अस्पताल फुल होने से अब गंभीर मरीजों को देखते ही चिकित्सक उन्हें आगरा रेफर कर रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि हालत बहुत गंभीर है, आगरा ले जाओ। कई तीमारदारों ने बताया कि आगरा में भी अस्पतालों में अब आसानी से जगह नहीं मिल रही है।

मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. संगीता अनेजा ने बताया कि सौ शैय्या अस्पताल में 450 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। मरीज लगातार डिस्चार्ज और भर्ती किए जा रहे हैं। हम मरीजों को बेहतर इलाज के लिए पूरा प्रयास कर रहे हैं।

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