तहसील मोहनलालगंज के ग्राम समेसी मे एक गरीब व्यक्ति का गिराया गया घर

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राष्ट्रीय जजमेंट न्यूज 

संवाददाता ए के दुबे

लखनऊ। मोहनलालगंज तहसील के उपजिलाधिकारी ने तहसील प्रशासन व पुलिस बल की उपस्थिती मे एक गरीब व्यक्ति रामदेव रावत पुत्र राम सनेही रावत निवासी बिहारी लाल ग्राम व खेड़ा मजरा समेसी के घर को जेसीबी मशीन से ध्वस्त कर दिया गया। उपजिलाधिकारी का कहना है कि घर पशुचर भूमि मे बनाया गया था।

भारतीय किसान यूनियन (भानू) संगठन द्वारा बताया गया कि आज लगभग चार वर्षों से समाज सेवी किसान संगठनों ने ग्राम पंचायत समेसी के सम्मानित किसान भाइयों ने भाजपा के कार्यकर्ताओं ने, भाजपा के शासन में बैठे पदाधिकारियों ने अनेको बार पत्र लिखकर उपजिलाधिकारी को अवगत कराया कि ग्राम पंचायत समेसी मे पशुचर तालाब खलिहान शमशान कब्रिस्तान खाद के गड्ढे परती बंजर भूमि पर रियल स्टेट और प्रापर्टी डीलरो व भूमाफियाओं का अवैध कब्जा है। इसलिए तत्काल प्रभाव से उपरोक्त भूमि को कब्जा मुक्त कराकर वास्तविक उपयोग हेतु सुरक्षित किया जाये।

लेकिन उपजिलाधिकारी ने आज तक इन पैसे वाले भूमाफियाओं से उपरोक्त भूमि कब्जा मुक्त नहीं करायी गयी। लेकिन आज एक बिना पैसे वाले गरीब व्यक्ति का घर गिराकर पशुचर खाली कराने हेतु दौड़ी चली आई।

यह कि इसी प्रकार उपजिलाधिकारी तहसील प्रशासन से सम्बद्ध ग्राम पंचायत समेसी का एक बड़ा ही दिलचस्प मामला आज कई दिनों से चर्चा का विषय बना हुआ है। मामला यह है कि ग्राम पंचायत समेसी निवासी आशिक अली, मासूक अली पुत्र गण रमजान ने दिनांक 21/02/1980 को शिवशंकर, रामार्जुन पुत्र गण राम अधार व मैकूलाल पुत्र मिश्रीलाल निवासी इस्माइल नगर से गाटा संख्या 1110 बैनामा कराया था। जिसका रकबा 2 बीघा 2 बिसुआ 6 बिसुआंसी है। जिस पर आज भी क्रेता गणों कब्जा है।

लेकिन तहसील प्रशासन की त्रुटिवस दाखिल खारिज परती बंजर भूमि गाटा संख्या 1010 मे हो गई। गाटा संख्या 1110 की दाखिल खारिज नहीं हुई। उपजिलाधिकारी व तहसील प्रशासन की मिलीभगत से गाटा संख्या 1110 फिर पुनः विक्रेताओ ने अपने नाम वापसी आर्डर कराकर फिर पुनः अगले व्यक्ति को बैनामा कर दिया और अगले व्यक्ति ने फिर पुनः अगले व्यक्ति को बैनामा कर दिया। अपने नाम जमीन कागज मे वापस कराकर कागज पर बेंच तो दिया।

लेकिन अब आई बात कब्जा देने की तो कब्जा देने हेतु शासन व प्रशासन के कुछ लोगो से मिलीभगत करके एक गरीब किसान की जमीन पर कब्जा करने का भरसक प्रयास किया और मार पिटाई की तथा मुकदमा भी लिखा गया दोनों पक्षों की ओर से अंततोगत्वा गरीब किसान का फैसला मंडल कार्यालय मोहनलालगंज हुआ विक्रेता ने उपजिलाधिकारी का आर्डर व खतौनी इन्दखाफ़ दिखायी और कहा यह खेत मेरा है।

तथा उपरोक्त गरीब किसान ने बैनामे की मूल प्रति दिखाई और कहा कि जब उपरोक्त गाटा बेंच दिया तो अब तुम्हारी जमीन कहां से आ गई इसी बात पर किसान के पक्ष में फैसला हो गया। अब मामला फंसा है किसान के पक्ष मे गाटा संख्या 1110 की दाखिल खारिज का और गाटा संख्या 1010 के निरस्तीकरण का उपजिलाधिकारी का कहना है कि आप मुकदमा करिए मै आदेश को निरस्त करके दाखिल खारिज के लिए आदेश कर दूंगी, लेकिन मेरा कहना है तहसील प्रशासन गलती करे गरीब किसान मुकदमा करता रहे यह कैसा न्याय है।

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