दिल्ली पुलिस की सराहनीय पहल, समाजगिरी का श्रेष्ठ उदाहरण, आरके पुरम थाने में लाइब्रेरी, सैनिटरी नैपकिन डिस्पेंसर और युवाओं के लिए योगा क्लास

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आर जे न्यूज़-

पुलिस और थाने का नाम आते ही अक्सर लोग डर जाते हैं। कोई नहीं चाहता की थाना तक जाना पड़े , हालांकि, अब समय बदल रहा है, पुलिस और लोगों के बीच की दुरी को कम करने की कोशिशें लगातार होती रही है। लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन करने के साथ साथ दिल्ली पुलिस अब सामाजिक कार्य करके समाजगिरी का उदाहर लगातार दे रही है। चाहें बात कोरोना काल के दौरान किए कार्य की हो या आज के, लगातार पुलिस का मानवीय और सामाजिक चेहरा भी नजर आता रहता है।

अगर इंसान में जब कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो उसकी राह में कैसे भी पहाड़ आ जाए उससे फर्क नहीं पड़ता। ऐसे इंसान तमाम मुसीबतों के बावजूद जरूरतमंदों की मदद करने के लिए कोई न कोई रास्ता खोज ही लेता है। एक ऐसी कहानी दिल्ली पुलिस के आरके पुरम थाने के एस एच ओ राजेश कुमार की है। जिन्होने आरके पुरम थाने में लाइब्रेरी, सैनिटरी नैपकिन डिस्पेंसर और युवाओं के लिए योगा क्लास शुरुआत कर समाजगिरी का श्रेष्ठ उदाहरण दिया है।

लाइब्रेरी बनाने का मकसद:-

थाने के आसपास कई झुग्गी-झोपड़ियों हैं, जहां के बच्चे या तो स्कूल नहीं जाते या स्कूल छोड़ चुके हैं। ऐसे में कोशिश है कि थाने की इस लाइब्रेरी की किताबें उनका भी मन लगा सकें और पढ़ाई की तरफ उनका ध्यान दोबारा आकर्षित हो। थानाध्यक्ष राजेश शर्मा ने कहा हमारी कोशिश यही है कि खासकर गरीब वर्ग के बच्चे पढ़ाई से वंचित ना रहे। जिन लोगों के घर में पढ़ाई के लिए जगह ही कमी है, वे यहां आकर पढ सकें यही सोचकर लाइब्रेरी बनायी गई। उनका मानना है कोई भी अपराधी नहीं बनना चाहता। छोटी उम्र में ही अगर बच्चों को सही दिशा दिखायी जाए तो उनके रास्ता भटकने की संभावना कम होती है।

लाइब्रेरी में सुविधाए:-

लाइब्रेरी सुबह 9 से शाम 5 बजे तक खुलती है और यह सबके लिए निःशुल्क है। 10वीं से ऊपर की क्लास के बच्चे-बच्चियों के लिए कॉम्पिटिटिव एग्जाम का पूरा मटीरियल है। एक साथ 100 छात्रों के बैठने की क्षमता है। इतना ही नहीं यहां पर 6ठी से 10वीं क्लास के बच्चों का पूरा सिलेबस ऑनलाइन उपलब्ध है। यहां स्मार्ट बोर्ड है, जिससे पढ़ने वाले अपने सिलेबस के बारे में कोई भी जानकारी ले सकते हैं।

अगर आप किसी चीज को लेकर शंका में हैं, तो यहां मौजूद टीचर आपको दूसरे टीचर से लाइव जोड़कर भी समस्या का समाधान करा सकते हैं। लाइब्रेरी में सभी प्रतियोगिता वाली परीक्षाओं से सम्बंधित 2000 से ज्यादा किताबें और 1900 से ज्यादा पुरानी मैगजीन हैं। रोजाना दस से 15 अखबार आते हैे। बच्चें अपनी पसंद के हिसाब से थाने की लाइब्रेरी में बैठकर कॉर्टून आदि पुस्तकें भी पढ़ सकते है। लाइब्रेरी में स्मार्ट क्लास की सुविधा और इंटरनेट के साथ कम्पयूटर भी मौजूद हैं। शिखर एनजीओ के साथ लाइब्रेरी की देखभाल करते हैं। लाइब्रेरी में एयर कंडीशन के अलावा सीसीटीवी भी लगाए गए हैं। लाइब्रेरी परसिर में ही टॉयलेट की सुविधा भी उपलब्ध हैं ।

राजेश शर्मा ने बताया की इस लाइब्रेरी में केवल इलाके के रहने वाले बच्चे ही नहीं बल्कि मालवीय नगर, दिल्ली कैंट, सरोजनी नगर आदि जगहों से भी पढने के लिए आते हैं। लाइब्रेरी सुबह से शाम तक सातों दिन खुलती है। रोजाना 70 से 80 बच्चे लाइब्रेरी में आते हैं। एक संस्था के सहयोग से बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी यहां निशुल्क कोचिंग दी जाती है। कोई भी इच्छुक छात्र यहां आकर अपना एडमिशन ले सकता है।

लाइब्रेरी में पढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण, करियर काउंसलिंग, एफआईआर और पुलिस प्रणाली आदि के बारे में सामान्य लोगों को बुनियादी जानकारी, रोजगार क्षमता को लेकर प्रशिक्षण, सूचना केन्द्र, महिला सुरक्षा कार्यक्रम, पुलिस और जनता के बीच बातचीत, पुलिस कर्मियों द्वारा लेक्चर , खेल और युवा विकास कार्यक्रम आदि कराए जाते हैं। इस लाइब्रेरी में गेल इंडिया का अहम योगदान है।

थाने में सैनिटरी नैपकिन डिस्पेंसर:-

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर थाने में सैनिटरी नैपकिन डिस्पेंसर लगाया गया है। ऐसा करने वाला यह दिल्ली का पहला पुलिस थाना है। इस डिस्पेंसर से थाने के स्टाफ के साथ ही कोई भी महिला या व्यक्ति सैनिटरी नैपकिन प्राप्त कर सकता है। यह नैपकिन बाजार दर से काफी कम में यानि सिर्फ पांच रुपये में मिलेगा। राजेश शर्मा ने बताया की थाने के आसपास कई झुग्गियां हैं जहां गरीब महिलाएं रहती हैं। आर्थिक और शैक्षणिक रूप से कमजोर परिवारों में लोग आज भी इस विषय पर बात नहीं करते हैं।

महिलाएं मेडिकल स्टोर पर सैनिटरी नैपकिन लेने जाने में झिझकती हैं। संगिनी सहेली एनजीओ की संस्थापक प्रियल भारद्वाज ने यहां पर डिस्पेंसर लगाने में सहयोग किया। वहीं, फैशन डिजाइनर रीना ढाका व चारू पाराशर ने थाने की महिला स्टाफ व आसपास की झुग्गी व कालोनी में रहने वाली महिलाओं व लड़कियों को इस बारे में जागरूक किया। इस परिसर में साउथ कैंपस थाना भी है। इसलिए साउथ कैंपस थाने के महिला स्टाफ व वहां आने वाले फरियादियों के लिए भी सुविधा हो गई है। थाने के पुरुष स्टाफ भी अपने घर की महिलाओं के लिए यहां से नैपकिन प्राप्त कर सकेंगे।

थाने में योगा क्लास:-

आर के पुरम थाने मे ही कल यानी 15 मार्च से योगा क्लास भी शुरू होने जा रहा है। आस पास के कई युवाओं ने इसमे पंजीकरण भी करवाया है। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल डिफेन्स के सहयोग से दिल्ली पुलिस और लाडली फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से योगाभ्यास शुरू होगा।

लाइब्रेरी को लेकर संम्मानित:-

थानाध्यक्ष राजेश कुमार को लाइब्रेरी शुरू करने को लेकर गोवा में एशिया पैसिफिक चैंबर आफ कामर्स की तरफ से इनोवेशन एजुकेशन की कैटेगरी में प्रशंसा सर्टिफिकेट देकर सम्मातिन किया है। राजेश शर्मा सम्मान को लेने खुद गोवा गए थे।

देश के सभी थाने इसके अनुकरण करे तो देश मे बहुत बड़ा बदलाव हो सकता है। आर के पुरम सिर्फ पुलिस थाना न रहकर ग़रीब लोग को समाज में जोडने का सामाजिक सेतु बन गया है। जहा कानून के साथ साथ समाजगिरी भी देखने को मिल रही हैं ।

रिपोर्ट:- भावेश पीपलीया दिल्ली एन सी आर ब्यूरो

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