नोटबन्दी इस देश का रहस्य है: Cm केजरीवाल

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नई दिल्ली,। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस के साथ दिल्ली में सत्तासीन आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी हमला बोला है।

 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा- ‘हालांकि, मोदी सरकार के वित्तीय घोटालों का कोई अंत नहीं है।
नोटबंदी भी उन्हीं में से एक है, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक दर्द दिया है।…दो साल भी नोटबंदी एक मिस्ट्री है, जिसने देश को बर्बादी की ओर ढकेला है।’
अरविंद केजरीवाल के अलावा, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममत बनर्जी और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने भी नोटबंदी की आलोचना की है। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने एक ट्वीट कर नोटबंदी की ‘कीमत’ बताई है।
शशि थरूर ने इस दिन को आपदा बताते हुए #DemonetisationDisasterDay के नाम से ट्वीट किया है। इसमें उन्होंने कहा है- ‘नोटबंदी के कारण नए नोट छापने पर 8 हजार करोड़ रुपए का खर्च आया,
15 लाख लोगों की नौकरी गई, 100 लोग जान से हाथ धो बैठे और जीडीपी में डेढ़ फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
उल्लेखनीय है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने वर्ष 2016-17 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि बंद किए गए एक हजार और पांच सौ के करीब एक फीसद नोट वापस हमारी प्रणाली में आ गए हैं।
भारत सरकार ने आठ नवंबर, 2016 को एक हजार और पांच सौ के पुराने नोट तत्काल प्रभाव से बंद कर दिए थे।
पुराने नोटों को बैंकों में जमा कराने की छूट दी गई थी, ताकि असामान्य स्तर की जमा राशि को आयकर महकमा अपने रडार पर ले सके।
सरकार ने कुछ ही दिनों में 500 रुपये के नए नोट जारी किए जबकि एक हजार के नोट की जगह पहली बार दो हजार रुपये का नया नोट जारी किया गया था। 
गौरतलब है कि 8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के नोट बंद करने का ऐलान किया था। मोदी का यह फैसला कालेधन, जाली नोटों और दो नंबर के पैसे पर कार्रवाई करने के लिए किया गया था। 
नोटबंदी के इस फैसले को लेकर जहां कई लोगों ने नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की तो वहीं एक तबके ने कड़ी आलोचना की। राजनीतिक पार्टियों में भी नोटबंदी और नरेंद्र मोदी को लेकर अलग अलग रवैया देखने को मिला।

भारत के 500 और 1000 रुपये के नोटों का विमुद्रीकरण को मीडिया वर्ग में नोटबंदी कहा गया। 8 नवंबर, 2016 को रात 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीवी पर एक संबोधन रखा और उसमें घोषणा की थी कि
500 और 1000 के नोट रात 12 बजे से बंद हो जाएंगे यानि 500 और 1000 के नोट महज कागज का टुकड़ा होंगे और उनकी जगह 500 और 2000 के नए नोट जारी किए जाएंगे। लोगों को कहा गया कि जिसके पास भी 500 और 1000 के नोट हैं वो उन्हें बैंकों में जमा करा दें।
नोट बदलने का सिलसिला दिसबंर 2016 तक चला। हालांकि इसके बाद भी नोट बदलने का सिलसिला जारी रहा।नोटबंदी जैसे बड़े फैसले को लेकर भले ही लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं रहीं, लेकिन इसके कई फायदे और नुकसान भी रहे।
8 नवंबर, 2016 से पहले साल 1946 में भी 1000 और 10,000 के नोटों को बैन कर दिया गया था और फिर 1954 में 5000, 1000 और 10,000 के नए नोट शुरू किए।
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फिर इसके बाद 16 जनवरी 1978 को जनता पार्टी की गठबंधन सरकार ने 5000, 10000 और 1000 के नोट बंद कर दिए गए थे ताकि काले धन और जाली नोटों पर रोक लगाई जा सके।

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