मुख्यमंत्री ने सड़क सुरक्षा के संबंध मे दिए दिशा-निर्देश

प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में अनफिट बिना परमिट के स्कूली बसों का नहीं होगा संचालन

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ए के दुबे
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने सड़क सुरक्षा को लेकर नागरिकों को जागरूक करते हुए अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए।
प्रत्येक नागरिक का जीवन अमूल्य है। एक व्यक्ति के असामयिक निधन से पूरा परिवार प्रभावित होता है। यह अत्यंत दुःखद है कि प्रति वर्ष बहुत से लोग थोड़ी सी असावधानी के कारण सड़क दुर्घटनाओं में असमय काल-कवलित हो जाते हैं। यह क्षति न हो इसके लिए हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
विभिन्न आकलन के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं का में सर्वाधिक 33% दो पहिया वाहन चालकों से जुड़े होते हैं। 38% दुर्घटनाओं का कारण ओवरस्पीड, 9% वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना और करीब 6.6% दुर्घटनाएं नशे में वाहन चलाने के कारण होते हैं। हर व्यक्ति को इस विषय की गंभीरता को समझना होगा।
सतत जागरूकता के कारण वर्ष 2018 के बाद से सड़क दुर्घटनाओं में कमी देखी जा रही है। यह अच्छे संकेत हैं, किंतु अभी बहुत सुधार की आवश्यकता है। इस दिशा में गृह, यातायात, नगर विकास, बेसिक, माध्यमिक, उच्च, प्राविधिक शिक्षा, स्वास्थ्य, एक्सप्रेस वे प्राधिकरण आदि विभागों को एकजुट होकर कार्य करना होगा।
सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अन्तर्विभागीय समन्वय के साथ वृहद अभियान चलाया जाना जरूरी है। एक टीम के रूप में बेहतर कार्ययोजना तैयार की जाए। इसमें सड़क सुरक्षा के विभिन्न घटकों जैसे रोड इंजीनियरिंग, प्रवर्तन कार्य, ट्रामा केयर और जनजागरूकता को समाहित किया जाना उचित होगा। यह कार्ययोजना अगले 06 दिवस में तैयार कर की जाए। अभियान प्रारंभ करने से पूर्व मैं स्वयं प्रदेश के सभी 734 नगरीय निकायों से संवाद करूंगा।
अभियान के प्रथम चरण में एक सप्ताह में हमारा जोर जागरूकता पर हो। सड़क सुरक्षा के सम्बन्ध में व्यापक जन-जागरूकता के कार्यक्रम संचालित किए जाएं। पब्लिक एड्रेस सिस्टम का अधिकाधिक प्रयोग किया जाना चाहिए। स्कूली बच्चों द्वारा जागरूकता विषयक प्रभात फेरी निकाली जानी चाहिए। लोगों को ट्रैफिक नियमों की जानकारी देते हुए पालन करने के लिए जागरूक किया जाए।
सड़क सुरक्षा अभियान के दूसरे चरण में इंफोर्समेंट की कार्रवाई हो। पूरे प्रदेश में सड़क सुरक्षा के नियमों का अनुपालन कड़ाई से सुनिश्चित कराया जाए। इस अभियान के उपरांत त्रैमासिक सड़क सुरक्षा सप्ताह का कार्यक्रम सतत जारी रखा जाएगा।
सड़कों पर अतिक्रमण की समस्या को समाप्त करना होगा। पटरी व्यवसायियों के स्थान का चिन्हांकन करते हुए यह सुनिश्चित करें कि कोई तय स्थान के बाहर दुकान न लगाएं। व्यापारियों से संवाद बनाकर यह सुनिश्चित कराएं की हर दुकान अपनी सीमा के भीतर ही हो। नगरों में पार्किंग की व्यवस्था को और सुदृढ़ करना होगा। अवैध टैक्सी स्टैंड की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। कोई बदलाव करते समय प्रभावित व्यक्ति के विधिवत व्यवस्थापन का ध्यान जरूर रखें।
प्रदेश में सड़क दुर्घटना से मृत्यु की दर में कमी के लिए बड़े पैमाने पर कार्य करने की आवश्यकता है। इसके लिए प्रदेश में उच्च शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा के सभी विद्यालयों में ‘रोड सेफ्टी क्लब’ का गठन करने की दिशा में कार्यवाही तेज करें।
प्रत्येक दशा में यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में अनफिट बिना परमिट के स्कूली बसों का संचालन नहीं होगा।
बेसिक और माध्यमिक स्कूलों में बच्चों को यातायात नियमों के पालन के लिए विशेष प्रयास किए जाने की जरूरत है। ट्रैफिक नियमों के पालन का संस्कार बच्चों को शुरुआत से ही दी जानी चाहिए। यातायात नियमों के संबंध में प्रधानाचार्यों प्राचार्यों विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों का प्रशिक्षण कराया जाए। अभिभावकों के साथ भी विद्यालयों में बैठक हो।
पूर्णतः प्रशिक्षित लोग ही सड़क पर वाहन चलाएं। ड्राइविंग टेस्टिंग प्रणाली के आइटोमेशन की आवश्यकता है। सभी जिलों में ड्राइविंग टेस्टिंग एंड ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट की स्थापना के प्रयास हों। जनपदों में ऑटोमैटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक का विकास किया जाए।
वाहन चालान से जुड़े लंबित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण के लिए लोक अदालतों का माध्यम अपनाया जाना उचित होगा।
यातायात विभाग को सशक्त बनाने के लिए पुलिस रेगुलेशन में यथाआवश्यक संशोधन की कार्यवाही की जाए। हर जिले में यातायात विभाग के पास कम से कम 01 इंटरसेप्टर जरूर हों।
यातायात विभाग के उच्च अधिकारी फील्ड विजिट करें। शहरों में यातायात प्रबंधन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का आकलन करें। स्थिति को बेहतर करने के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ संवाद करें। नगर विकास विभाग द्वारा बरसात से पूर्व नालों की सफाई करा ली जाए।
ऐसा देखा जा रहा है कि अनेक अवैध डग्गामार बसें उत्तर प्रदेश की सीमा से होकर विभिन्न राज्यों की ओर जा रही हैं। यह बसें ओवरलोड होती हैं। इनकी स्थिति भी जर्जर होती हैं। परिवहन विभाग द्वारा विशेष सतर्कता बरतते हुए ऐसे बसों के संचालन को रोका जाए। इनके परमिट सहित अन्य दस्तावेजों की जांच हो। ओवरलोडिंग के विरुद्ध कठोरता से कार्रवाई की जाए।
हर मेडिकल कॉलेज में न्यूनतम 30 बेड के इमरजेंसी ट्रॉमा केयर सेंटर के विकास किया जाना जरूरी है। इस दिशा में प्राथमिकता के साथ कार्यवाही की जाए।
लखनऊ में यातायात प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान की स्थापना के लिए प्रक्रिया शुरू की जाए। ट्रैफिक पुलिस के साथ यथावश्यक सिविल पुलिस और होमगार्ड के जवानों को जोड़ा जाए।
राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे पर ओवरस्पीड के कारण आए दिन दुर्घटनाओं की सूचना मिलती है। ऐसे में ब्लैक स्पॉट के सुधारीकरण, स्पीड मापन, त्वरित चिकित्सा सुविधा, सीसीटीवी आदि व्यवस्था को और बेहतर करने की जरूरत है। सम्बंधित प्राधिकरणों को इस दिशा में गंभीरता से विचार करते हुए कार्य करना होगा। यह सुनिश्चित किया जाए कि राजमार्गों पर ट्रकों की कतारें न लगें। एम्बुलेंस रिस्पॉन्स टाइम को और कम करने की जरूरत है।

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