पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनने पर एंटी-रोमियो स्क्वॉड बनाने बाले योगी के बयान पर बबाल

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पश्चिम बंगाल की एक चुनावी जनसभा में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने गुरुवार को कहा जब बीजेपी पश्चिम बंगाल की सत्ता में आयेगी, तो बहनों और बेटियों की सुरक्षा के लिए यूपी की तरह एंटी-रोमियो स्क्वॉड का गठन किया जायेगा जो स्कूलों के बाहर घूमने वाले शोहदों से निपटेगा

उनके इस बयान का तृणमूल कांग्रेस की लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा  “अजय बिष्ट उर्फ़ सीएम योगी का ताज़ा बयान सुनिये: ‘अगर बंगाल में बीजेपी की सरकार बनी तो यहाँ भी एंटी-रोमियो स्क्वॉड बनायेंगे  गुड्डू जी, आपके शोहदों के विपरीत, बंगाली लोग दिल से प्यार करने वाले लोग हैं! हमें अपना संगीत पसंद है हमें अपनी कविताएं पसंद हैं, अपनी मिष्टी पसंद है और हाँ, अपने रोमियो भी पसंद हैं.सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं के बयानों की काफ़ी चर्चा हो रही है. दोनों के ही पक्ष और विपक्ष में लोग खुलकर लिख रहे हैं.

साल 2017 में, उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने के बाद बीजेपी ने ‘एंटी-रोमियो स्क्वॉड’ नामक दल का गठन किया था जिसे लेकर दावा था कि वो प्रदेश में महिलाओं, ख़ासकर लड़कियों की सुरक्षा का काम करेगा.हालांकि, भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल के अपने घोषणा-पत्र में ऐसे किसी दल के निर्माण का वादा नहीं किया है.कुछ पुरानी मीडिया रिपोर्ट्स पर नज़र डालें, तो उत्तर प्रदेश के ‘एंटी-रोमियो स्क्वॉड’ पर महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर कुछ लोगों का उत्पीड़न करने के आरोप लगे थे.

उत्तर प्रदेश में ‘एंटी-रोमियो स्क्वॉड’ ने अपने गठन के पहले दो महीने में ही 200 से ज़्यादा जोड़ों को पकड़कर उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की थी.उस समय उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कुछ जोड़ों के साथ हाथापाई के वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफ़ी वायरल हुए थे.आदित्यनाथ योगी के इस बयान पर तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ताउनका कहना है, “वो (योगी) एक बेवकूफ़ है, जिसे आप शेक्सपियर के नाटकों में ढूंढ पायेंगे. ऐसे स्क्वॉड का सभ्य समाज में क्या काम. ये हमें नाज़ी (हिटलर की तानाशाही के दौर) सैनिकों की याद दिलाता है

सीपीएम के महिला विंग की नेता कनिका घोष कहती हैं, यह आदमी सिर्फ़ आरएसएस का पोस्टर बॉय हो सकता है. वो पहले अपने राज्य को संभालें. महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों के मामले में उनका राज्य लिस्ट में सबसे ऊपर है उन्हें पश्चिम बंगाल के बारे में बोलने का कोई अधिकार नहीं

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