वीकेएसयू में एमबीए के डायरेक्टर का काला खेल,बिना ऑर्डिनेंस एंड रेगुलेशन के चला रहे विभाग

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राष्ट्रिय जजमेन्ट न्यूज़

रिपोर्ट- विजय शंकर ओझा

आरा: वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के एमबीए विभाग में लाख कोशिशों के बावजूद ऑर्डिनेंस और रेगुलेशन के तहत नामांकन और परीक्षा नही कराई जा रही है।एमबीए विभाग में बिना क्लास किये विश्वविद्यालय के एफए ओम प्रकाश के पुत्र आकाश समेत कई विद्यार्थियों के परीक्षा फार्म भरवाने और परीक्षा में शामिल कराकर अधिकतम अंक दिलवाने का मामला प्रकाश में आने के बाद अब एक बार फिर एमबीए सेमेस्टर एक की परीक्षा कराने की प्रक्रिया में भी भारी अनियमितता किये जाने की बात सामने आई है।वीकेएसयू के परीक्षा विभाग ने एमबीए सत्र 2022-24 सेमेस्टर एक की परीक्षा के लिए फॉर्म भरवाने का आदेश जारी कर दिया है।

परीक्षा नियंत्रक डॉ. अनवर इमाम ने परीक्षा फार्म भरने की तिथि बिना विलम्ब शुल्क के साथ 16 जनवरी से 21 जनवरी 2022 घोषित कर दी है।परीक्षा फार्म भरने का कार्य शुरू हो गया है किंतु इसमें भी एमबीए के ऑर्डिनेंस और रेगुलेशन का घोर उल्लंघन किया जा रहा है।एमबीए के राजभवन और विवि द्वारा अनुमोदित इस ऑर्डिनेंस एंड रेगुलेशन के बिल्कुल विपरीत बिना आंतरिक परीक्षा के परीक्षा विभाग एमबीए विभाग को परीक्षा का फॉर्म भरवाने का आदेश जारी कर दिया है और परीक्षा फार्म भी उपलब्ध करा दिया है।यह सिलसिला लगातार कई वर्षों से चल रहा है और एकबार फिर एमबीए सेमेस्टर एक सत्र 2022-24 की परीक्षा फार्म भरवाने को लेकर भी ऐसा ही गैर जिम्मेदाराना,अनियमित और अवैध तरीके से आदेश परीक्षा नियंत्रक द्वारा जारी कर दिया गया है।बता दें कि वीकेएसयू के एमबीए विभाग से प्रति वर्ष डिग्री लेकर बड़ी संख्या में छात्र पास आउट होते हैं और आगे चलकर वे एक कंपनी या व्यावसायिक संस्थाओं के प्रबन्धन के प्रमुख की जिम्मेदारी निभाते हैं।

ऐसे में अनियमित तरीके से परीक्षा में शामिल होकर और गलत तरिके से डिग्री लेकर पास आउट होने वाले छात्र किसी कम्पनी या व्यवसायिक संस्थानों को कितनी ऊंचाई पर ले जाएंगे और देश के आर्थिक बदलाव में कैसी भूमिका निभाएंगे यह सहज ही समझा जा सकता है।अगर जल्द यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो.शैलेन्द्र कुमार चतुर्वेदी ने एमबीए के डायरेक्टर पर शिकंजा नही कसा और अनियमित तरीके से चल रहे परीक्षाओं पर जांच कराते हुए कार्रवाई नही की तो आजादी की लड़ाई का विरासत मूल्य रखने वाले 1857 के गद्दर के महानायक वीर कुंवर सिंह के नाम पर स्थापित यूनिवर्सिटी की राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी बदनामी हो सकती है।

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