शासन,सरकार और सिस्टम को करारा तमाचा

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गरीबों का हमदर्द बन कर “बिहार विकास मोर्चा” लिख रहा है नई ईबारत

असहाय, विधवा और बुजुर्गों के बीच अलाव की व्यवस्था के साथ, बाँटे जा रहे हैं कम्बल

मुकेश कुमार सिंह

सहरसा (बिहार) : बीते कुछ वर्षों की अपेक्षा, इस साल कड़ाके की ठंढ़ पड़ रही है। इस हाड़ को थर्रा देनी वाली ठंढ़ में, सबसे अधिक तकलीफ में गरीब तबके के लोग हैं। ऐसे कठिन समय में सरकार, जिला प्रशासन से लेकर नगर परिषद की जिम्मेवारी बनती थी कि सबसे पहले उनके माध्यम से, जिला मुख्यालय के मुख्य चौक-चौराहे पर अलाव की व्यवस्था कराई जाती लेकिन पूरा सिस्टम ही सोया हुआ है। ऐसे हालात में, जो काम सरकार और सिस्टम को करना चाहिए, वह काम एक सामाजिक संगठन कर रहा है। सहरसा में कड़ाके की ठंढ़ पर रही है लेकिन सरकार और जिला प्रशासन को गरीबों की कोई चिंता नहीं है।

बिहार के सहरसा में सामजिक संगठन बिहार विकास मोर्चा, ना केवल गरीबों के बीच अलाव की व्यवस्था कर रहा है बल्कि मंहगे कम्बल का वितरण भी कर रहा है। संगठन के संरक्षक सह वार्ड नम्बर 12 के पार्षद राजेश कुमार सिंह के आवासीय परिसर में डेढ़ से लेकर दो सौ के बीच कम्बल का वितरण, वार्ड के असहाय, विधवा और बुजुर्ग के बीच किया गया । इस मौके पर कम्बल हासिल करने वाले लाभुकों ने समवेत स्वर में कहा कि वार्ड पार्षद कुमार सिंह, संगठन के संयोजक सोनू तोमर, युवा प्रदेश अध्यक्ष आशीष रंजन और संगठन के जिलाध्यक्ष राजा राम चौधरी देवता हैं। इतना बढ़िया कम्बल, उन लोगों ने अपने जीवन में पहली बार हासिल किया है।

संगठन के संयोजक सोनू तोमर ने कहा कि बीते पाँच दिनों से अलाव की व्यवस्था और कम्बल का लगातार वितरण, शहर के विभिन्न हिस्से में किया जा रहा है। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। संगठन का मकसद है कि जाति और धर्म से ऊपर उठ कर, सभी की सेवा करना। हम अपनी क्षमता से अधिक करने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले दस साल से हमारा सेवा अभियान सहरसा के अलावे, बिहार के अन्य जिलों में भी चलता रहा है। संगठन के संरक्षक सह वार्ड पार्षद राजेश कुमार सिंह ने कहा कि वे संगठन के संरक्षक होने के साथ-साथ पार्षद भी हैं।

उन्हें इस बात का बेहद दुःख है कि नगर परिषद की तरफ से गरीबों के लिए कम्बल की व्यवस्था, अभी तक नहीं की गई है। संगठन के अन्य भाईयों के साथ मिल कर वार्ड नम्बर 12 के असहाय, लाचार, बेबस और मजबूर लोगों के बीच पहले मास्क और फिर बेहतर कम्पनी का कम्बल वितरण किया जा रहा है। इस कम्बल वितरण के साथ-साथ हम लोगों को मास्क भी दे रहे हैं, जिससे कोरोना गाईडलाईन्स का सही तरीके से पालन हो सके।

अभी करीब दो सौ कम्बल बाँटे गए हैं। आगे और जरूरतमंदों को खोज-खोज कर कम्बल बाँटने का हमने फैसला ले रखा है। ये जमीन, मकान और सारे ऐशो-आराम यहीं रह जाएंगे और व्यक्ति दुनिया छोड़ देगा। इस मदद के जरिये, हम अधिक से अधिक लोगों के बीच, खुशी बाँटने की कोशिश कर रहे हैं। आशीष रंजन ने कहा कि जब हमने सिस्टम को सोया हुआ देखा, तो हमें अपनी सामाजिक जिम्मेवारी का अहसास हुआ।

सबसे पहले हम लोगों ने, जगह-जगह अलाव की व्यवस्था कराई और अब कम्बल वितरण का हमारा अभियान चल रहा है। औरों के लिए जीने की कोशिश ही, असली जीवन है। जानकारी के मुताबिक यह कम्बल वितरण का कार्यक्रम, कम से कम एक सप्ताह और चलेगा।

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