लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ पता नहीं क्यों समाज में फैले भ्रष्टाचार की समीक्षा नहीं कर पा रहा है?
परिंदो की उड़ानों को अभी कुछ आम होने दो..!
अभी सूरज नही डूबा अभी कुछ शाम होने दो..!
मुझे बदनाम करने का बहाना ढूंढते क्यों हो..!
मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले नाम होने दो..!!
लोकतन्त्र के स्वतन्त्र आवरण के बीच चौपाये के रूप में ख्याति…