देश मे बिजली संकट दूर करने के बजाय सरकार कर रही झूठे दावे, उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम पर कोल इंडिया का 1500 करोड़ का कर्जा

प्रदेश में विद्युत आपूर्ति के आधार स्तंभ उत्पादन निगम की परियोजनाओं में कोयला संकट का प्रमुख कारण भुगतान का लंबित होना है। इसके बाद भी उत्पादन निगम प्रबंधन के साथ ही प्रदेश सरकार के स्तर पर भी संकट के मूल कारण को लेकर कोई पहल नहीं की जा रही है। ऐसे में बिजली घरों में कोयला संकट कैसे दूर होगा यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है।

उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम पर कोल इंडिया का 1500 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। इसमें अकेले एनसीएल का 1352 करोड़ रुपये है। शेष बीसीसीएल व सीसीएल के हैं। कोल प्रबंधन का कहना है कि उसके पास कोयले की कोई कमी नहीं है। किसी को भी कोयले की आपूर्ति नहीं रोकी गई है। सिर्फ भुगतान करने वालों को वरीयता दी जा रही है।

अक्तूबर में उत्पादन निगम की ओर से एनसीएल को नौ दिन के कोयले की आपूर्ति के 85 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जबकि 12 दिन बीत चुके हैं। ऐसे में नया भुगतान भी लंबित होता जा रहा है। ऐसी स्थिति में अगर एनसीएल की ओर से एमजीआर से भी कोयले की आपूर्ति रोक दी गई तो निगम की सबसे बड़ी 2630 मेगावाट की परियोजना से उत्पादन ठप हो जाएगा। इससे प्रदेश में ब्लैक आउट का संकट पैदा हो सकता है।

अनपरा परियोजना में कोयले के स्टॉक में गिरावट का क्रम जारी है। मंगलवार की सुबह परियोजना का स्टॉक 69190.5 एमटी पहुंच गया। इससे प्रबंधन की मुश्किलें जहां बढ़ती जा रही हैं, वहीं राहत के आसार दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे हैं।

Comments are closed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More