चुनाव खत्म, महंगाई शुरू, वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर के दाम में भारी वृद्धि, एटीएफ भी महंगा

राष्ट्रीय जजमेंट न्यूज़

पांच राज्यों के लिए मतदान खत्म होने के ठीक दो दिन बाद मोदी सरकार ने एलपीजी की कीमतों में बड़ी वृद्धि कर दी है, हालांकि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई वृद्धि नहीं की गयी है। इसी के साथ अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों के लिए एटीएफ यानी विमान ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गयी है, जिससे आने वाले समय में हवाई यात्रा महंगी होना लगभग तय माना जा रहा है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ये फैसले सामने आए हैं। उल्लेखनीय है कि सरकारी स्वामित्व वाली तेल कंपनियों, जिनमें प्रमुख रूप से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन शामिल है, उसने आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल, डीजल और घरेलू रसोई गैस की कीमतों को स्थिर रखा है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है, जबकि मुंबई में पेट्रोल 103.54 रुपये और डीजल 90.03 रुपये प्रति लीटर पर कायम है। इसके विपरीत, एक मई 2026 यानि आज से वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में औसतन 993 रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक सिलेंडर की नई कीमत 3071.50 रुपये हो गई है। वहीं 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत 913 रुपये पर स्थिर रखी गई है, जिससे आम रसोई उपयोगकर्ताओं को तत्काल राहत मिली है।इसी क्रम में अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों के लिए एटीएफ की कीमतों में लगभग पांच प्रतिशत की वृद्धि की गई है। दिल्ली में इसकी कीमत बढ़कर 1,511.86 डॉलर प्रति किलोलीटर हो गई है। हम आपको बता दें कि यह लगातार दूसरा महीना है जब विमान ईंधन महंगा हुआ है। इससे पहले एक अप्रैल को इसमें करीब 25 प्रतिशत की भारी वृद्धि की गई थी। हालांकि घरेलू विमानन कंपनियों के लिए एटीएफ कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे घरेलू यात्रियों पर तत्काल प्रभाव सीमित रखने की कोशिश की गई है।इस वृद्धि के पीछे मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू राजनीतिक तनाव माना जा रहा है। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए बड़ा झटका साबित हुआ है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस के परिवहन का मुख्य मार्ग है। इसके बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी आई है, जिसका असर अब विभिन्न ईंधनों की कीमतों में दिखाई दे रहा है।इसी के साथ मोदी सरकार ने अप्रत्याशित लाभ कर में भी कटौती की है ताकि निर्यात क्षेत्र पर दबाव कम किया जा सके। डीजल पर निर्यात शुल्क घटाकर 23 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जो पहले 55.5 रुपये प्रति लीटर था। वहीं एटीएफ पर यह कर 42 रुपये से घटाकर 33 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। पेट्रोल पर निर्यात शुल्क शून्य ही रखा गया है। इसके साथ ही डीजल के निर्यात पर सड़क और अवसंरचना उपकर को भी इस पखवाड़े के लिए शून्य कर दिया गया है।उल्लेखनीय है कि तेल मार्केटिंग कंपनियां हर महीने की शुरुआत में एलपीजी कीमतों की समीक्षा करती हैं। अप्रैल महीने में भी कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई थी, जब घरेलू सिलेंडर के दाम में 60 रुपये और वाणिज्यिक सिलेंडर में 196 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। इससे पहले मार्च में भी 114.5 रुपये की वृद्धि की गई थी। ऐसे में मई में कीमतों में और वृद्धि की संभावना पहले से जताई जा रही थी।इस बीच, सोशल मीडिया पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि को लेकर कई भ्रामक संदेश तेजी से फैलने लगे। जिस पर सरकार ने तुरंत सफाई देते हुए इन दावों को पूरी तरह गलत बताया। पीआईबी की तथ्य जांच इकाई ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है और वायरल दस्तावेज फर्जी है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी कहा है कि फिलहाल खुदरा ईंधन कीमतों में वृद्धि का कोई प्रस्ताव नहीं है। इससे यह संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के बावजूद आम उपभोक्ताओं पर तत्काल बोझ डालने से बचने की कोशिश की जा रही है।
कुल मिलाकर मोदी सरकार और तेल कंपनियों ने आम जनता को राहत देने और वैश्विक दबावों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है। जहां एक ओर घरेलू उपभोक्ताओं को सीधे असर से बचाया गया है, वहीं वाणिज्यिक और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों में लागत बढ़ने के संकेत साफ हैं। यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो आने वाले समय में इसका व्यापक असर घरेलू बाजार और हवाई यात्रा दोनों पर देखने को मिल सकता है।

Comments are closed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More