किसानों का इंतजार खत्म! पीएम किसान योजना की 22वीं किस्त जारी, खाता में आए ₹2000, ऐसे करें

राष्ट्रीय जजमेंट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को असम के गुवाहाटी में पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त जारी की, जिसके तहत 93 लाख किसानों को 18,640 करोड़ रुपये वितरित किए गए। इस योजना के अंतर्गत, पात्र किसानों को हर चार महीने में 2,000 रुपये, यानी कुल मिलाकर सालाना 6,000 रुपये, सीधे उनके बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से प्राप्त होते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 नवंबर को तमिलनाडु के कोयंबटूर में पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 21वीं किस्त जारी की, जिसके तहत 9 करोड़ से अधिक किसानों को 18,000 करोड़ रुपये वितरित किए गए। अब तक 22 किस्तों में पीएम मोदी इस योजना के तहत 42 लाख करोड़ रुपये से अधिक वितरित कर चुके हैं।इस दौरान मोदी ने कहा कि आज देश के किसानों और असम के टी गार्डन में काम करने वाले साथियों के लिए भी बड़ा दिन है। कुछ क्षण पहले पूरे देश में पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि हमारे करोड़ों अन्नदाताओं के खातों में भेजी गई है। इसके अलावा असम के चाय बागानों से जुड़े अनेक परिवारों को आज भूमि के पट्टे भी दिए गए हैं। मैं असम के लोगों को, यहां के सभी परिजनों को और देशभर के सभी किसानों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि ये वही किसान भाई-बहन हैं, जिनमें से अधिकांश के पास 2014 से पहले न मोबाइल फोन था और न ही बैंक में उनका कोई खाता था। आज ऐसे करोड़ों किसानों के खातों में अब तक सवा चार लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पैसे जमा हो चुके हैं।उन्होंने कहा कि मुझे याद है, जब पीएम किसान सम्मान निधि योजना शुरू हुई तो अफवाहें फैलाने में, झूठ बोलने में माहिर कांग्रेस वाले कहते थे कि इस योजना का पैसा आज भले ही मोदी देता है, लेकिन चुनाव के बाद वापस करना पड़ेगा। लेकिन आज सम्मान निधि की यह योजना देश के छोटे किसानों के लिए सामाजिक सुरक्षा का एक मजबूत माध्यम बन चुकी है। भाजपा—एनडीए सरकार के लिए किसान हित से बड़ा कुछ भी नहीं है। जब किसानों को पैसे देने की बात आती थी, तो कांग्रेस वालों की सांस अटक जाती थी। 2014 से पहले केंद्र में 10 साल तक कांग्रेस की सरकार थी। कांग्रेस सरकार के 10 साल में किसानों को एमएसपी के रूप में साढ़े छह लाख करोड़ रुपये मिले थे। जबकि हमारी सरकार के 10 साल में किसानों को एमएसपी के रूप में 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक मिल चुके हैं।

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