800 करोड़ का काला साम्राज्य, 70 गिरफ्तारी, 128 FIR… एक ट्रक से कैसे खुला यूपी का सबसे बड़ा कोडीन सिरप सिंडिकेट?

18 अक्टूबर 2025, सोनभद्र के वाराणसी-शक्तिनगर हाईवे पर चुर्क मोड़. यहां सोनभद्र पुलिस ने एक ट्रक रोका, आबकारी टीम भी साथ थी. ड्राइवर घबराया तो पुलिस को शक हुआ.ट्रक में कोडीन कफ सिरप की शीशियां मिलीं.
इन्हें चिप्स और स्नैक्स के पैकेट से छिपाया गया था. बात आई-गई होती अगर उसी वक्त देश में कफ सिरप को लेकर हल्ला न मचा होता.

दरअसल अक्टूबर के शुरुआत में ही मध्य प्रदेश और राजस्थान में 24 बच्चों की कफसिरप की वजह से मौत हो चुकी थी. यूपी में हाईअलर्ट था, सिरप के कागज नहीं थे. पुलिस की जांच में ट्रक गाजियाबाद से निकला, सोनभद्र पुलिस की एक टीम वहां पहुंची और मछली शहर गोदाम से डेढ़ लाख सिरप की शीशियां बरामद कीं. मामला गंभीर होता जा रहा था, उच्चाधिकारी इसमें शामिल हो चुके थे, ऐसे में तय किया गया कि मामले की तह तक पहुंचा जाएगा.

सोनभद्र की एक सड़क से शुरु हुआ ये मामला इतने बड़ा सिंडिकेट निकलेगा उस समय पुलिस को भी ये अंदाजा नहीं था. गाजियाबाद में जो छापेमारी हुई उसमें सौरभ त्यागी, सहारनपुर के विभोर राणा और वाराणसी के शुभम जायसवाल का नाम सामने आया. सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक तीन सदस्यीय SIT गठित की गई. यूपी के जौनपुर, चंदौली, गाजीपुर, आजमगढ़ समेत झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश के शहरों में भी छापेमारी हुई, लाखों बोतल कोडिन कफ सिरप की बरामद हुईं. पुलिस कफ सिरप बनाने वाली फैक्ट्रियों तक पहुंची और इस सारी मशक्कत की सुई घूमी शुभम जायसवाल की तरफ.

800 करोड़ से ज्यादा की कमाई

शुभम इस पूरे मामले का किंगपिन बताया गया जो बनारस से इस पूरे नेटवर्क को चलाता था. शुभम न तो कफ सिरप बनाता था और न ही इसकी बिक्री करता था, फिर भी महज 3 सालों में ही उसने तकरीबन 150 करोड़ की संपत्ति बना ली थी. कभी बाइक से चलने वाला आरोपी अब डिफेंडर, बीएमडब्यू समेत अन्य लग्जरी गाड़ियों के काफिले से चल रहा था. ईडी की 8 जनवरी को जारी की गई रिपोर्ट में कहा है कि उसने कफ सिरप के धंधे से कुल 800 करोड़ से ज्यादा की कमाई की थी.

कोडिन कफ सिरप मामले अब तक 70 से ज्यादा लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, 28 जिलों में तकरीबन 128 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं. हालांकि इस मामले का मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल अभी फरार है, ऐसा दावा किया जा रहा है कि वह दुबई में है, जिसे भारत लाने के प्रयास किए जा रहे हैं.

परत दर परत इस मामले का खुलासा कैसे हुआ, कितने लोग गिरफ्तार हुए और कैसे ये पूरा गिरोह काम करता था, कफ सिरप बांग्लदेश क्यों जाता था और वहां इसका इस्तेमाल किसलिए होता था, यूपी के गृह विभाग के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद, औषधि प्रशासन विभाग की सचिव रोशन जैकब और डीजीपी राजीव कृष्ण ने विस्तार से बताया है. इसके अलावा ये भी जानकारी दी है कि आरोपी को भारत वापस लाने के लिए किस तरह की कोशिशें हो रही हैं. News18 ने एसआईटी में शामिल एसीपी कोतवाली शुभम कुमार सिंह से बात की.

उन्होंने बताया कि इस केस में SIT जांच कर रही है.केस को स्ट्रांग करने के लिए जिन भी फर्मो से इस पूरे कांड में लेन देन हुए है उनकी पूरी हिस्ट्री जुटाई गई है.डॉक्यूमेंट कलेक्ट करने के साथ हमारी टीम इस मामले में शामिल अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए भी लगातार प्रयास कर रही है.शैली ट्रेडर्स से जिन-जिन फर्मो के लेन देन हुए है उनकी भी जांच की जा रही है. इसके अलावा शुभम जायसवाल के वकील शैलेंद्र सिंह से भी बातचीत की कोशिश की, मगर उनसे बातचीत नहीं हो सकी. इस रिपोर्ट में शुभम के उस वीडियो को शामिल किया गया है जिसमें उसने खुद को निर्दोष बताया था.
कैसे कफ सिरप किंग बना शुभम जायसवाल

शुभम इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी बताया जा रहा है, उस पर अलग-अलग कुल 75 हजार रुपये का इनाम घोषित किया जा चुका है. दरअसल 6 साल पहले शुभम जायसवाल वाराणसी के हरिश्चंद्र कॉलेज में पढ़ाई किया करता था. उसकी चाहत नेता बनने की थी. इसके लिए पैसों की जरूरत थी, कोरोना ने उसे यह मौका दिया.

वह मेडिकल होलसेलिंग के धंधे में घुसा और धीरे धीरे ऐसा नेटवर्क खड़ा किया जिसने उसे कफ सिरप किंग बना दिया. इसके लिए उसने रांची की शैली ट्रेडर्स कंपनी की मदद ली, जिसके प्रोपराइटर शुभम जायसवाल के पिता भोला प्रसाद ही थे. कंपनी के पास होलसेलिंग का नेटवर्क था, मगर शुभम ने इससे ऐसी सप्लाई चेन तैयार की, जिससे सिरप कंपनी से तो मंगाया गया, मगर मेडिकल स्टोरों में सप्लाई की जगह उसे बांग्लादेश और नेपाल भेजा जाने लगा.

इसके लिए सिर्फ एक कंपनी नहीं बल्कि दो से तीन कंपनियों का माल उठाया गया. सीधे विदेश भेजने की बजाय उन्हें यूपी के अन्य अन्य हिस्सों से होकर बाहर बांग्लादेश भेजा. जहां 100 से 120 रुपये प्रति शीशी खरीदा जाने वाला यह कफ सिरप बांग्लादेश में 1800 से 2000 रुपये में बिकता था.

काले कारोबार से मुनाफा बढ़ा और देखते ही देखते बाइक पर चलने वाला शुभम लग्जरी गाड़ियों का काफिला लेकर चलने लगा. पिछले साल उसने नेतागीरी की तैयारी भी शुरू कर दी थी, जब दीपावली पर उसने पूरे बनारस में मेडिकल होलसेलर और अन्य दवा कारोबारियों को मिठाई भी बंटवाई थी, जिस डिब्बे में मिठाई भेजी गई थी, उस पर शुभम जायसवाल की फोटो भी लगी थी. इसके अलावा बनारस के गली चौराहों पर भी उसके होर्डिंग लगने लगे थे.

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