वाराणसी में पत्नी के न‍िधन का सुनते ही पति ने भी तोड़ द‍िया दम, अजब प्रेम की गजब कहानी

वाराणसी (बड़ागांव)। विकास खंड पिंडरा के लल्लापुर गांव निवासी विशुन उर्फ सिपाही, जिनकी उम्र 80 वर्ष थी, अपनी पत्नी दूइजा देवी के साथ रहते थे, जिनकी उम्र 77 वर्ष थी।
दोनों के बीच इतना गहरा प्रेम था कि वे जीवन के हर सुख दुख में एक साथ खड़े रहे, चाहे वह घरेलू काम हो या खेतों में काम करना। उनके बीच कभी भी किसी प्रकार का झगड़ा नहीं हुआ। उनके चार पुत्र हैं: अनंत प्रकाश उर्फ तूफानी, रतन कुमार उर्फ बासु, चंद्रभान उर्फ चंदू, चंद्र भूषण उर्फ बल्ली और एक पुत्री उर्मिला देवी। उनका परिवार भरा-पूरा था और सभी सदस्य एक-दूसरे के साथ मिलकर रहते थे।

शन‍िवार की सुबह पांच बजे दूइजा देवी का निधन हो गया। इस दुखद समाचार की सूचना उनके बड़े पुत्र ने विशुन उर्फ सिपाही को दी। जैसे ही उन्होंने यह खबर सुनी, यह सदमा उनके लिए बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया और उनकी तबीयत बिगड़ने लगी।
मात्र आधे घंटे के भीतर, विशुन उर्फ सिपाही ने भी अंतिम सांस ली। इस प्रकार, दोनों ने एक साथ इस संसार को अलविदा कह दिया। उनके अटूट प्रेम और एक साथ निधन की चर्चा गांव में तेजी से फैल गई, जिससे आस-पास के गांवों से भी लोग उनके दरवाजे पर पहुंचने लगे।

विशुन उर्फ सिपाही के दो पुत्र सूरत में रहते हैं। उनके आने के बाद शव यात्रा घर से निकलकर वाराणसी के मणिकर्णिका घाट गई, जहां उनका दाह संस्कार परंपरागत रूप से क‍िया गया। इस दुखद अवसर पर दरवाजे पर पहुंचने वालों में राम जी सिंह, दशरथ पटेल, देव प्रकाश देवा, पूर्व प्रधान राम नारायण, जगनारायण, वंशराज पटेल, नसरुद्दीन, शमशेर, वर्तमान प्रधान राजेंद्र प्रसाद पटेल, पूर्व प्रधान लाल बहादुर विश्वकर्मा, प्यारेलाल वर्मा सहित दर्जनों लोग उपस्थित रहे।
इस घटना ने गांव में बुजुर्ग दंपती के बीच संबंधों की अनोखी कथा की छाप छोड़ी है। विशुन और दूइजा का जीवन एक-दूसरे के प्रति समर्पण और प्रेम का प्रतीक था। उनके निधन ने सभी को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि जीवन में प्रेम और एकता कितनी महत्वपूर्ण होती है। उनके चार पुत्र और एक पुत्री ने अपने माता-पिता के इस प्रेम को हमेशा याद रखने का संकल्प लिया है।

गांव के लोग इस दंपति के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं और उनके जीवन को एक प्रेरणा मानते हैं। यह घटना न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे गांव के लिए एक दुखद क्षण है। विशुन और दूइजा का प्रेम, जो कि जीवन के अंतिम क्षणों में भी एक साथ था, सभी के लिए एक मिसाल की तरह चर्चा में बना हुआ है।

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