केजरीवाल पर भाजपा का आरोप, स्वाधीनता दिवस की गरिमा को किया तार-तार, स्वाति मालीवाल मामले में भी घेरा

राष्ट्रीय जजमेंट

नई दिल्ली। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा है की 15 अगस्त पर स्वाधीनता दिवस के उपलक्ष्य में ध्वजारोहण को लेकर जेलवासी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को लिखा पत्र प्रमाणित करता है की आम आदमी पार्टी और उसके नेता कल भी आराजक थे आज भी आराजक हैं। राष्ट्र ध्वज प्रोटोकोल अनुसार राज्यों में केवल मुख्य मंत्री के द्वारा ध्वजारोहण का प्रावधान है। शायद संविधान एवं राष्ट्र ध्वज प्रोटोकोल निर्माताओं ने कभी कल्पना भी नही की होगी की कभी देश में ऐसा हठधर्मी मुख्य मंत्री आयेगा जो जेल जा कर भी पद से इस्तीफा नही देगा।
मुख्य मंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा मंत्री आतिशी को ध्वजारोहण अधिकार देने को लेकर उपराज्यपाल को भेजे आराजकता पूर्ण पत्र ने उनके द्वारा 2014 में राजपथ पर धरना देकर गणतंत्र दिवस समारोह बाधित करने की घोषणा की भयावह याद ताज़ा कर दी है। सचदेवा ने कहा है की अरविंद केजरीवाल ने 2014 में गणतंत्र दिवस की गरिमा को ठेस पहुंचाई थी और आज 2024 में स्वाधीनता दिवस की गरिमा को भी तार तार किया है।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा है की दिल्ली सरकार के स्वाधीनता दिवस समारोह में दिल्ली के मुख्य मंत्री ही ध्वजारोहण कर सकते हैं और यदि वह नही करने आ सकते तो फिर परम्परा अनुसार दिल्ली के उपराज्यपाल ध्वजारोहण करेंगे। 1991से 1993 एवं 2014 में जब दिल्ली में मुख्य मंत्री नही थे तब उपराज्यपाल ने ध्वजारोहण किया था। यदि अरविंद केजरीवाल अपनी मंत्री आतिशी से ध्वजारोहण करवाना चाहते हैं तो उन पर विश्वास करें और खुद इस्तीफा देकर उन्हे मुख्य मंत्री पद की शपथ दिलवायें।

सचदेवा ने कहा है कि एमपी स्वाति मालीवाल की पिटाई के मामले की चार्जशीट आंखें खोल देने वाली है और बड़े षड्यंत्र की ओर स्पष्ट संकेत करती है। स्वाति मालीवाल का केजरीवाल परिवार से लंबा संबंध रहा है और यह संभव नही है कि सीएम अरविंद केजरीवाल के पीएस विभव कुमार बिना केजरीवाल परिवार की सहमति के स्वाति मालीवाल को एक कठोर शब्द भी कह सकें, विभव द्वारा उन्हें पीटने की वास्तविक घटना की तो बात ही छोड़ दें। सचदेवा ने कहा कि यह व्यापक सार्वजनिक चर्चा में रहा है कि अरविंद केजरीवाल को राज्यसभा में एक सीट की आवश्यकता थी क्योंकि उन्होंने जेल जमानत मामले में अपने वकील को सदस्यता का वादा किया था और शायद केजरीवाल चाहते थे कि वह इस्तीफा दें, लेकिन जब उन्होंने इनकार कर दिया तो विभव कुमार ने उन्हे धमकाने का कार्यभार संभाल लिया।

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