डोनाल्‍ड ट्रंप गणतंत्र दिवस समारोह में हिस्‍सा नहीं लेंगे , ठुकराया मोदी का न्‍यौता

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आगामी गणतंत्र दिवस परेड में भारत ने ट्रंप को बतौर अतिथि शामिल होने का न्यौता दिया था। अब खबर आयी है कि डोनाल्ड ट्रंप ने भारत का यह न्यौता ठुकरा दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के अनुसार,
अमेरिका ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को एक पत्र भेजकर अपने इस फैसले की जानकारी दी है। पत्र में अमेरिका ने दुख जताते हुए कहा है कि
राष्ट्रपति ट्रंप अपनी घरेलू जिम्मेदारियों के चलते भारत का यह न्यौता स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।
दरअसल भारत और अमेरिका के संबंध इन दिनों थोड़े तनावपूर्ण बने हुए हैं। माना जा रहा है कि इसी के चलते ट्रंप ने भारत का न्यौता स्वीकार नहीं किया है। बता दें कि
भारत और अमेरिका के संबंधों में खटास का कारण हाल ही में भारत और रुस के बीच हुआ रक्षा समझौता है। जिसमें भारत ने अमेरिकी आपत्ति के बावजूद
रुस के साथ S-400 एअर डिफेंस मिसाइल सिस्टम खरीदने का करार किया है। जिसके चलते भारत पर अमेरिकी कानून काटसा (CAATSA) के तहत प्रतिबंध लगने का भी डर बना हुआ है
डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिका में सालाना आयोजित होने वाली स्टेट ऑफ यूनियन की बैठक को संबोधित करना है। हालांकि यहां ये बात गौर करने लायक है कि
ट्रंप के पूर्ववर्ती बराक ओबामा ने साल 2015 में अपनी घरेलू जिम्मेदारियों के बावजूद भारत के गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने का न्यौता स्वीकार किया था।
खबर के अनुसार, भारत ने बीती 13 जुलाई को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने का आधिकारिक न्यौता भिजवाया था। हालांकि इस पर अमेरिका ने अपने जवाब में कहा था कि
वह भारत और अमेरिका के बीच सितंबर में होने वाली 2+2 बैठक के बाद कोई फैसला करेगा। अब जिस तरह से अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत का न्यौता ठुकराया है, उससे दोनों देशों के संबंधों में आए तनाव का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है!
अमेरिका ने ईरान पर भी आगामी 4 नवंबर से प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इसके तहत अमेरिका ने अन्य देशों को भी ईरान से कच्चे तेल की आपूर्ति रोकने को कहा है। ऐसा ना करने वाले देशों पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है।
हालांकि भारत ने अपनी तेल जरुरतों को सर्वोपरि रखते हुए ईरान से तेल के आयात पर पूरी तरह से रोक लगाने पर असमर्थता जतायी थी। इतना ही नहीं भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने ईरान के साथ नवंबर तक तेल की आपूर्ति के लिए करार भी किए हैं।
ये भी एक कारण है कि अमेरिकी सरकार भारत के इस फैसले से थोड़ी असहज है। हालांकि इस मुद्दे पर स्थिति 4 नवंबर के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
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बता दें कि भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति को भारत दौरे के लिए फरवरी माह में भी तारीखें सुझायीं थीं। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने फिलहाल इसमें भी असमर्थता जतायी है।
यकीनन ट्रंप द्वारा भारत के न्यौते को अस्वीकार कर दिए जाने के कई रणनीतिक मतलब निकाले जा रहे हैं।

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