नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने विश्वविद्यालयों में अंतिम वर्ष की परीक्षाएं सितंबर के अंत तक ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन कराने के फैसले को लेकर शुक्रवार को सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पहले सही मायनों में देश को डिजिटल बनाया जाए और फिर डिजिटल परीक्षा की बात हो।
ऑल इंडिया प्रोफेशनल कांग्रेस की दिल्ली इकाई की ओर से वीडियो कॉन्‍फ्रेंस के माध्यम से आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री ने ये भी कहा कि कोरोना महामारी का संकट खत्म होने के बाद परीक्षाएं ली जाएं।
उन्होंने कहा, हम यह नहीं कह रहे हैं कि परीक्षा मत लीजिए। हमारा सिर्फ यह कहना है कि परीक्षा उस वक्त लीजिए जब चीजें सामान्य हो जाएं। फिलहाल के लिए छात्रों को प्रोन्नति देने के लिए उनके पिछले प्रदर्शन पर विचार किया जाए।

सिब्बल ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा, आप डिजिटल इंडिया के बारे में बातें करते रहते हैं, लेकिन देश को डिजिटल तौर पर नहीं जोड़ते हैं। यह किस तरह की राजनीति है? पहले डिजिटज इंडिया बनाइए और फिर डिजिटल परीक्षा लीजिए।
उन्होंने कहा कि सभी छात्रों के पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है, देश के कितने ही परिवारों की इतनी सालाना आय ही नहीं है की वो स्मार्ट फ़ोन खरीद सकें। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पूर्व प्रमुख सुखदेव थोराट और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति ज़मीरूद्दीन शाह ने भी इस कार्यक्रम में अपनी बात रखी।
विश्वविद्यालयों में अंतिम वर्ष की परीक्षाएं सितंबर के अंत तक आयोजित होंगी। यूजीसी के दिशा-निर्देशों में कहा गया है, विश्वविद्यालय अथवा संस्थान द्वारा अंतिम वर्ष की परीक्षाएं ऑनलाइन, ऑफलाइन या दोनों माध्यमों से सितंबर अंत तक  आयोजित की जाएंगी।

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