टिड्डी दल
फसलों पर टिड्डियों का हमला वाकई गंभीर चिंता का विषय है,एक तरफ पूरे देश में कोरोना के संक्रमण से सभी इंसान प्रभावित हैं, दूसरी तरफ इसी संकट काल में देश के विभिन्न राज्यों में किसानों की फसलों पर टिड्डियों के दल मंडराने लगे हैं। वर्तमान समय पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश तक में टिड्डियों का प्रकोप देखा जा सकता है।
कोरोना महामारी के कारण किसान पहले से ही परेशान हैं और अब बिहार के किसानों के सामने टिड्डी हमला भी होने की आशंका बढ़ गई हैं, अन्य राज्यों में टिड्डियों के कारण तबाही को देखते हुए, बिहार में इस संबंध में एडवाइजरी जारी की जाएगी।
बिहार में मक्का, सब्जी, आम और लीची की फसल वर्तमान में खेतों और बगीचों में होती है, इसलिए उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान होगा।बिहार के किसानो को अलर्ट रहना होगा,किसानों को टिड्डियों के बारे में सचेत रहने की जरुरत है। टिड्डियां जिस भी फसल पर बैठती हैं उसे पूरी तरह से नष्ट कर देती हैं। टिड्डी दल में लगभग ढाई इंच लंबे कीड़े होते हैं जो कुछ ही घंटों में किसान का खेत साफ कर देते हैं।
बताया गया है कि अफ्रीका से उड़कर पाकिस्तान के रास्ते इन टिड्डियों ने भारत में प्रवेश किया हैं। देश मे टिड्डियों के हमले से सबसे अधिक प्रभावित राजस्थान हुआ है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक, टिड्डी दलों का प्रकोप पूरब की ओर बढ़ रहा है। यह भी बताया गया है कि इससे खाद्य सुरक्षा को खतरा बढ़ सकता है।
मध्य प्रदेश से सटे बुंदेलखण्ड में टिड्डियों द्वारा धावा बोलने के उपरांत अब वे यूपी के मिर्जापुर, चंदौली और सोनभद्र में प्रवेश कर चुकी हैं।
दिल्ली, हरियाणा तथा ओडिशा आदि राज्यों में भी टिड्डी दलों के पहुंचने की आशंका के मद्देनजर हाई अलर्ट जारी किया गया है तथा वहां एडवाइजरी जारी की गई है। टिड्डियों पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार भी प्रयत्नशील है,टिड्डेदांत इस कदर नुकीले होते हैं कि ये मजबूत पेड़ को भी कुछ ही देर में खत्‍म कर देते हैं।
15-20 किमी की स्‍पीड से उड़ने वाले ये दल ज्‍यादातर हवा के रुख के साथ आगे बढ़ते जाते हैं और इनका पहला शिकार खेतों में खड़ी फसलें ही होती हैं। एक दिन में ये टिड्डी दल 150-200 किमी की दूरी तय कर लेता है। इन टिड्डियों का बड़ा दल लोगों के दिलों में दहशत तक पैदा कर सकता है।
ये टिड्डी दल जितना फसलों के लिए नुकसानदेह है उतना ही इंसानों के लिए भी खतरनाक है। यही वजह है कि राजस्‍थान समेत कुछ दूसरे राज्‍यों में इनसे बचने के लिए बाकायदा लोगों को हिदायत दी जाती है कि वे घरों के दरवाजे-खिड़की बंद करके रखें। उनके मुताबिक इनके बड़े दलों में एक अरब तक टिड्डियां हो सकती हैं।
हॉर्न ऑफ अफ्रीका समेत कुछ दूसरे अफ्रीकी देश जिनमें सुडान, इथियोपिया, केन्‍या और सोमालिया समेत मिडिल ईस्‍ट के देशों और दक्षिण एशियाई देशों में इनका कहर लगभग हर वर्ष टूटता है। दिन के उजाले में ज्यादा नुकसान पहुंचाता हैं
दिन के दौरान झुंडों के रूप में सूरज की तेज रोशनी में टिड्डियों के दल उड़ता हैं और शाम को झाड़ियों और पेड़ों पर आराम करने के लिए उतरता हैं।
टिड्डियों को उनके रास्ते से भटका कर और रासायनिक दवाओं का छिड़काव करके नियंत्रित किया जा सकता है। जब दिन के दौरान टिड्डे दिखाई देते हैं, तो ड्रम, टिन बॉक्स, आदि को एक साथ बजाकर टिड्डियों के मार्ग को बदला जा सकता है, टिड्डियों को सुबह 11 बजे से सूर्योदय तक रोकने के लिए रासायनिक छिड़काव सही समय माना जाता है।
आशुतोष मिश्रा (पटना) की रिपोर्ट RJ ✍️

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