डिलीवरी के दौरान बच्चे की मौत
24 मार्च के बाद से लगे लॉकडाउन में मजदूरों का बड़े शहरों से अपने गांव-घर जाने का जो सिलसिला शुरू हुआ है, वह रुकने का नाम नहीं ले रहा है. हजारों मजदूर अब भी लगातार अपने गांव की तरफ़ जा रहे हैं. वह भी इस चिलचिलाती धूप में पैदल. उनकी हजारों कहानियों उन्हीं सड़कों पर दफन हो जा रही है, जिसे नापकर वे अपने घर पर पहुंच रहे हैं.

 

इन कहानियों में से कुछ किस्से हमारे पास तक भी पहुंच रही है, जिनमें उनके संघर्ष और त्याग की दास्तां होती है. अपने गांव तक पहुंचने में इनमें न कइयों की मौत हो जा रही है. सैकड़ों, हजारों किमी चलकर किसी तरह घर पहुंचने की इनकी चाह इनकी आंखों, शब्दों और शरीर की थकावट दर्शा रही है.
ऐसे ही पंजाब के लुधियाना से बिहार के चले एक शख्स की प्रेग्नेंट बीवी ने बीच रास्ते में ही बच्चे को जन्म दिया. वह लुधियाना से हरियाणा के अंबाला पहुंची थी. लेकिन, जन्म के कुछ ही देर बाद बच्चे की मौत हो गयी
बिंदिया और उसके पति लुधियाना से क़रीब 100  किमी पैदल चले थे. इसी बीच बिंदिया को तेज दर्द हुआ और अंबाला में सड़क किनारे ही उसने बच्चे को जन्म दिया. दोनों पति-पत्नी की उम्र 25 साल के आस-पास है. कपल ने अंबाला सिटी में ही बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया. दोनों की शादी 2 साल पहले ही हुई थी और यह उनका पहला बच्चा था.
रिपोर्ट के मुताबिक, बिंदिया पिछले साल ही राम के साथ बिहार से अंबाला आई थी. राम एक फैक्ट्री में लेबर का काम करता है. कोरोना वायरस के लॉकडाउन में ज्यादातर वर्कर अपने गांव की डिलीवरी के दौरान बच्चे की मौत तरफ़ चले गए. कुछ पैदल ही गए तो कुछ गाड़ियों पर किराया देकर.
राम और बिंदिया ने भी स्पेशल ट्रेन में रजिस्ट्रेशन की कोशिश की. लेकिन, सफल नहीं होने पर वे पैदल ही गांव के लिए निकल गए. बिंदिया को प्रॉपर डाइट नहीं मिल पा रही थी और वह बहुत कमजोर थी. राम का कहना था कि लॉकडाउन के पहले तक सब अच्छा था, लेकिन लॉकडाउन ने उसकी स्थिति खराब  कर दी
आशुतोष मिश्रा (पटना) की रिपोर्ट ✍️

 

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