Chamba medical college
चंबा मेडिकल कॉलेज में एक्सपायर दवाइयों को प्रबंधन ने चुपचाप आगे के हवाले कर दिया।
वीरवार को टीबी अस्पताल के पास खुले में दवाइयों को एक पेटी में डालकर आग लगा दी गई।
प्रबंधन की इस कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठ रहे हैं। दवाइयां कैसे एक्सपायर हो गईं।
अगर ये एक्सपायर हो भी गईं तो इन्हें वापस क्यों नहीं किया गया या फिर इन्हें वैज्ञानिक विधि से क्यों नहीं जलाया गया।
ऐसा क्या हुआ कि इन्हें जलाना पड़ा।
बायोमेडिकल वेस्ट को नष्ट करने के लिए वैज्ञानिक विधि का इस्तेमाल करना पड़ता है।
चंबा अस्पताल में बायोमेडिकल वेस्ट खुले में फेंका जा रहा है।
एक्सपायर हो चुकी दवाईयों को खुले में जलाया जा रहा है।
हैरानी इस बात की है यह सारा कारनामा विभागीय अधिकारी के सामने हो रहा है।
अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पहले भी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन केे बायोमेडिकल वेस्ट वैज्ञानिक विधि से नष्ट करने को लेकर निर्देश दिए जा चुके हैं।
बावजूद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन समझने को तैयार नहीं।
दवाइयों को आग लगाकर वातावरण को प्रदूषित किया जा रहा है।
जहां पर ये दवाईयां जलाई जा रही हैं।
वहां रहने वाले लोगों की सेहत पर इसका बुरा असर पड़ रहा है।
एक तरफ अस्पतालों में कई मरीजों को दवाइयां न मिलने के कारण परेशानी उठानी पड़ती है।
वहीं, अस्पताल में दवाइयां एक्सपायर हो रही हैं।
सवाल है कि समय रहते दवाइयों को मरीजों को क्यों नहीं बांटा जाता है।
ऐसे दवाइयां जलाने से अस्पताल प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर अनूप वैद्य ने बताया कि खुले में दवाईयों को नहीं जलाया जा सकता।
इसके लिए बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट कमेटी बनी है।
जो अस्पतालों से एक्सपायर होने वाली दवाईयों को एकत्रित करती है।
अगर चंबा में खुले में दवाइयां जलाई जा रही हैं,
तो मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और चिकित्सा अधीक्षक से पूछताछ की जाएगी।

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