ये है भारत का अपना GPS, सरकार ने बताया – गूगल मैप्स से भी बेहतर इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर केंद्र
सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science and Technology – DST)
की मदद से सर्वे ऑफ इंडिया काम कर रहा है।
इसमें आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया जैसे कई
सरकारी संस्थानों से भी मदद ली जा रही है।
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
(Department of Science and Technology – DST) की मदद से सर्वे ऑफ इंडिया काम कर रहा है।
इसमें आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया जैसे
कई सरकारी संस्थानों से भी मदद ली जा रही है।इस बारे में DST सचिव आशुतोष शर्मा का कहना है
कि ‘इस तरह की डिजिटल मैपिंग पहले कभी नहीं हुई है।
देश का यह अपना मैप गूगल मैप्स (Google Maps) से भी बेहतर रिजॉल्यूशन का होगा।
इसमें आपके शहर के हर गली, सीमाएं साफ और सही दिखाई देंगी।’
सर्वे ऑफ इंडिया ने इसके लिए पूरे देश में हर 20 किमी की दूरी पर रेफरेंस प्वाइंट बनाया है,
जिसे कॉन्टीन्यूअसली ऑपरेटेड रेफरेंस स्टेशन (CORS) नेटवर्क कहते हैं।
इससे 3डी पोजिशनिंग मिलेगी और एक्यूरेसी 10 गुना तक ज्यादा होगी।
इस बारे में DST सचिव आशुतोष शर्मा का कहना है
कि ‘इस तरह की डिजिटल मैपिंग पहले कभी नहीं हुई है।
देश का यह अपना मैप गूगल मैप्स (Google Maps) से भी बेहतर रिजॉल्यूशन का होगा।
इसमें आपके शहर के हर गली, सीमाएं साफ और सही दिखाई देंगी।’
सर्वे ऑफ इंडिया ने इसके लिए पूरे देश में हर 20 किमी की दूरी पर रेफरेंस प्वाइंट बनाया है,
जिसे कॉन्टीन्यूअसली ऑपरेटेड रेफरेंस स्टेशन (CORS) नेटवर्क कहते हैं।
इससे 3डी पोजिशनिंग मिलेगी और एक्यूरेसी 10 गुना तक ज्यादा होगी।
सचिव आशुतोष शर्मा ने बताया कि राज्यों को इस प्रोजेक्ट के लिए उनके उत्साह के आधार पर चुना गया है।
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जैसे हरियाणा में मैपिंग का खर्च वह राज्य खुद उठा रहा है।
वहीं गंगा बेसिन के लिए नमामि गंगे एजेंसी खर्च वहन कर रही है।’
बेंगलुरू के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) में डीएसटी सचिव आशुतोष शर्मा ने बताया कि
भारत में आम लोगों के लिए यह स्वदेशी जीपीएस 2024 तक उपलब्ध हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि अब से 5 साल पहले इसका खर्च करीब 10 हजार करोड़ आ रहा था।
वही काम आज एडवांस्ड तकनीक के साथ करीब एक हजार करोड़ रुपये की लागत में हो रहा है।

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