राजा भैया ने कराया अपनी ताकत का एहसास, कहा- कुंडा वाले अब कुंडली लिखेंगे

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लखनऊ। राजा भईया ने कहा, कुंडा वाले अब कुंडली लिखने वाले हैं। इतनी भीड़ की कल्पना नहीं थी, लेकिन यूपी ही नहीं बल्कि नेपाल से भी लोग यहां पहुंचे हैं। कहा, बहुत ऐसे मुद्दे हैं, जिसमें बहुत दल गोलमोल जवाब देते हैं।
जल्दी ही पार्टी का मेनिफेस्टो जारी होगा। उत्पीड़न होने पर सवर्णों को भी मुआवजा मिलेगा। शहीद जवानों के परिवारों को एक करोड़ रुपए दिए जाएंगे।
राजधानी के रमाबाई मैदान में रैली के मंच से लोगों को प्रणाम करते हुए प्रतापगढ़ की कुंडा सीट से बाहुबली निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया ने शुक्रवार को अपने राजनीतिक जीवन के सिल्वर जुबली पर बाहुबल का प्रदर्शन किया।
राजा भैया के राजनीतक सफर के 25 साल पूरा होने पर उनके समर्थकों ने लखनऊ के रमाबाई मैदान में महारैली का आयोजन किया है। इस रैली में बसपा प्रमुख मायावती रैली करतीं रही हैं। मंच से राजा भैया ने कहा कि,

चुनाव आयोग में तीन नाम, जनसत्ता दल, जन सत्ता पार्टी और लोक जनसत्ता पार्टी दिए गए हैं। जिनमें से पार्टी का नाम तय होगा। यह पार्टी विस्तार से जब पार्टी का गठन हो जाएगा तब मैनिफेस्टो बनाया जाएगा। लेकिन गरीब किसान और मजदूर के लिए यह पार्टी समर्पित है।
राजा भैया ने कहा कि, जाति पूछकर मुआवजा दिया जा रहा है। उत्पीड़न होने पर दलित को ज्यादा कष्ट होगा, अन्य को नहीं? हम दलित विरोधी नहीं है, लेकिन दलित के लिए अलग मुआवजा में भेदभाव क्यों?
हम यह नहीं कहते दलित समाज के मुआवजे में कटौती हो, अगर किसी की यहां हत्या हो जाती है तो मुआवजा में भेद भाव न हो। देश की सुरक्षा के लिए जवान सीमा पर तैनात रहते हैं।
ऐसे जवानों को शहीद होने पर योजनाओं का लाभ मिलता है। लेकिन हमारी सरकार में जवान के परिवार को एक करोड़ रुपए दिए जाएंगे। इसमें जाति नहीं देखी जाएगी।
1989 में राजीव गांधी जी ने एससी-एसटी एक्ट बनाया गया और इसको अब और जटिल बनाया जा रहा। अभी हाल में सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय दिया, यह एक्ट हमारे समाज के लिए गलत है और
जो राजनीतिक दल एक दूसरे को गालियां देते हैं, वह एक स्वर से कानून में संशोधन एक्ट संसद में पास कर दिए। उन्होंने कहा कि, हत्या या किसी भी अपराध में पीड़ित को मिलने वाला मुआवजा एक समान होना चाहिए।
जाति के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। लेकिन सियासतदान जाति के आधार पर वैमनस्यता फैलाते हैं।
आरक्षण का एक बार जो लाभ ले चुके हैं, उन्हें इसे छोड़ना चाहिए, ताकि वंचित को यह मिल सके। हमारी पार्टी पटरी पर शताब्दी ट्रेन से भी तेज दौड़ेगी। इस रैली में कोई सरकारी मशीनरी नहीं लगी है। इसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में लोग आए।
राजा भैया ने कहा, पूरे प्रदेश से लोग आए हुए हैं। लेकिन कुंडा से जो सहयोग मिलता है, वह और विशेष है। कुंडा में कुल 4 लाख वोटर और मात्र 12 हजार हैं, लेकिन हर बार जीतने का प्रतिशत बढ़ जाता है।
अब कुंडा वाले अब कुंडली लिखने वाले हैं। इस ऐतिहासिक भीड़ की कल्पना किसी को नहीं थी और न ही हमको यह कल्पना थी।
गृहस्थी एक दिन में इकट्ठा नहीं होती है। जैसे घर बनता तो किसी दिन बेड आता है, किसी दिन कुछ और। इसलिए जनसत्ता पार्टी होने सारी गृहस्थी इक्कठा हो जाएगी।

राजा भैया ने 26 साल की उम्र में 1993 में पहली बार कुंडा विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की थी। इसके बाद से वह कभी भी हारे नहीं। लगातार इसी सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल करते आ रहे हैं। वह कुंडा सीट से लगातार छठवीं बार विधायक हैं।
बसपा मिटाने में जुटी थी तो मुलायम बने सहारा
भाजपा व सपा सरकार में मंत्री भी रह चुके राजा भैया सपा प्रमुख मुलायम सिंह के बहुत खास लोगों मे माने जाते थे। बसपा सुप्रीमो मायावती अपने कार्यकाल में राजा भैया को मिटाने में लगी थीं तो
मुलायम सिंह यादव ने राजा भैया को सियासत का चेहरा ही नहीं, बल्कि प्रदेश का ठाकुर चेहरा बना दिया। समाजवादी पार्टी में राजा भैया ठाकुर नेताओं के नेता बन गए।
लेकिन दोबारा समाजवादी सरकार में अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनते ही, राजनैतिक गलियारों चर्चा चली कि राजा भैया को अखिलेश अपने मंत्रिमंडल में नहीं शामिल करना चाहते हैं तो
मुलायम के चलते उन्हें कैबिनेट में जगह देनी पड़ी। लेकिन अखिलेश यादव मौका मिलने पर राजा भैया को साइड लाइन करने में जुटे रहे। कुंडा में सीओ की हत्या कांड में राजा भैया का नाम आने के बाद राजा भैया का इस्तीफा ले लिया।

लेकिन इस प्रकरण में राजा भैया दोष मुक्त हुए। मुलायम सिंह यादव के दबाव में अखिलेश यादव को उन्हें दोबारा मंत्री बनाना पड़ा। लेकिन अखिलेश ने वह रुतबा नहीं दिया, जो पहले था।
इसके बाद अखिलेश यादव व राजा भैया के बीच विवाद खुलकर सामने आने लगे। राजा भैया मंत्री बनने के बाद विभाग के विवाद को लेकर ऑफिस नहीं गए। लेकिन अखिलेश भी अपने फैसले पर डिगे रहे।
अंत में राजा को झुकना पड़ा। मुलायम सिंह यादव से बेहतर संबंध होने के कारण राजा भैया ने कभी खुलकर अखिलेश यादव का विरोध नहीं किया। लेकिन अखिलेश यादव -राजा भैया विवाद उस वक्त ज्यादा गहरा गया जब
अखिलेश यादव की लाख कोशिश करने के बाद राजा भैया ने राज्यसभा चुनाव में मायावती के उम्मीदवार को वोट नहीं दिया।

राजा भैया का अच्छा खासा प्रभाव प्रतापगढ़ और इलाहाबाद जिले के कुछ हिस्से में हैं। उनकी छवि एक दबंग और क्षत्रिय नेता के तौर पर है।
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ऐसे में अलग-अलग पार्टियों के क्षत्रिय विधायकों से उनके रिश्ते काफी बेहतर हैं। राजाभैया, राज्य की सपा सरकार में मंत्री भी रहे हैं।

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