चार साल बाद लखनऊ महोत्सव में दिखाई देगा ग्रामीण भारत

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लखनऊ,। दुधारू देशी गायों से होने वाले फायदे के साथ ही फसल में लगने वाले कीटों से बचाव के तरीकों से भी किसानों को रूबरू किया जाएगा।
खेती के साथ ही आर्थिक रूप से समृद्ध किसानों की तस्वीर दर्शकों को बरबस अपनी ओर खींचेगी।
यहां मुर्गी पालन और एकीकृत खेती करते किसान नजर आएंगे तो सौर ऊर्जा से खेतों की सिंचाई का लाइव प्रदर्शन किया जाएगा। 
चार साल बाद एक बार फिर लखनऊ महोत्सव में ग्रामीण भारत की तस्वीर नजर आएगी, जिसकी कल्पना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी। शहरी युवाओं को गांव की माटी की खुशबू भी महोत्सव में मिलेगी।
आशियाना के स्मृति उपवन सांस्कृतिक स्थल पर 25 नवंबर से पांच दिसंबर तक लखनऊ महोत्सव का आयोजन होगा। वर्ष 2014 से बंद चल रहे ग्रामीण स्टॉल इस बार एक बार फिर लगाए जाएंगे।
100 से अधिक स्टॉलों वाला यह क्षेत्र अटल ग्रामीण भारत की कल्पनाओं को साकार करेगा। छप्पर के नीचे बैठे ग्रामीण और शौचालय निर्माण के प्रति ग्रामीणों की चेतना महोत्सव के स्टॉल में नजर आएगी तो
बिजली बचाने के लिए सौर ऊर्जा का प्रयोग कैसे किया जाए, इस बारे में भी बताया जाएगा। हर दिन 200 से अधिक किसानों को यहां आमंत्रित किया जाएगा।
फन जोन प्रभारी सचिन त्रिपाठी ने बताया कि बच्चों के लिए हेलीकॉप्टर के स्वरूप का झूला उन्हें हवा में उड़ने का अहसास कराएगा तो ऑक्टोपस, टोरेंटो जैसे झूले भी बड़ों को अपनी ओर खींचने का काम करेंगे।
मिकी माउस, जंपिंग वाल व भूतघर छोटे बच्चों के लिए खास होगा, तो लिफ्ट झूला युवाओं को अपनी ओर खींचेगा।
महोत्सव में वैसे तो मुख्य पंडाल में हर दिन स्थानीय और बाहर के कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। वहीं ग्रामीणों के लिए अलग सांस्कृतिक पंडाल बनेगा।
भोजपुरी गायक जहां भोजपुरी गीतों का गुलदस्ता पेश करेंगे तो बुंदेलखंडी व राजस्थानी कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
जिला कृषि अधिकारी ओपी मिश्र ने बताया कि 2014 के बाद एक बार फिर लखनऊ महोत्सव आने वाले शहरी दर्शकों को ग्रामीण भारत नजर आएगा।
महोत्सव परिसर में इसका अलग स्थान चिह्न्ति किया जाएगा। 50 से अधिक स्टॉलों पर किसानों की समृद्धि को लाइव दिखाया जाएगा।
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उप कृषि निदेशक डॉ.सीपी श्रीवास्तव की ओर से अटल ग्रामीण भारत का खाका तैयार किया गया है। तैयारियां शुरू हो गई हैं।

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