डॉ कमलेश वर्मा ने पैर की हड्डी से बनाया मुँह का जबड़ा- लखनऊ

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लखनऊ, फ्री फिबुला फ्लैप- द्वारा पैर (फिबुला) से हड्डी के साथ जबड़े की हड्डी (मैंडिबल) को फिर से बनाने के लिए प्लास्टिक सर्जन डॉ निखिल पुरी, और सर्जिकलऑन्कोलॉजिस्ट, डॉ कमलेश वर्मा द्वारा अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स में एक सर्जरी की गई।
अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स के सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, डॉ कमलेश वर्मा ने बताया, “मरीज़ के जबड़े के आसपास का ट्यूमर बेहद बढ़ चुका था और और इसी कारणवश वह कभी भी फूट सकता था। कम्पोजिट टिश्यू लॉस आमतौर पर अधिक व्यापक होता है, और फिबुला फ्लैप की ज़रुरत पड़ती है। सर्जरी का मानसिक और शारीरिक रूप से रोगी दोनों के जीवन पर समग्र प्रभाव पड़ता है।“
अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स के कंसलटेंट, प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के डॉ निखिल पुरी ने बताया, ” एक युवा निचले जबड़े की हड्डी में ट्यूमर के साथ आया था। सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, डॉ कमलेश वर्मा ने सर्वप्रथम मुँह से कैंसर ट्यूमर को बाहर निकाला और बाद में डॉ निखिल पुरी द्वारा पैर से हड्डी की मदद से जबड़े की हड्डी का पुनर्निर्माण किया गया। इस जटिल और तकनीक की सर्जरी में, पैर की छोटी हड्डी (फिबुला) को त्वचा और उसकी रक्त वाहिकाओं के साथ-साथ पैर से सुरक्षित रूप से निकला गया।
तब पर से निकली हड्डी को जबड़े की हड्डी का आकार दिया गया और प्लेट और स्क्रेव्स के साथ शेष जबड़े की हड्डी के साथ जोड़ा गया था। इसके बाद रक्त वाहिकाओं (आर्टरीज़ एवं वेइन्स) को वैस्कुलर अनस्तोमोसिस (प्रत्यारोपित भाग को आपूर्ति प्रदान करने के लिए माइक्रो वैस्कुलर तकनीक) द्वारा गर्दन की वाहिकाओं के साथ कटे हुए पैर की हड्डी को जोड़ा गया। यह सर्जरी 7 घंटे तक जारी रही। रोगी को अब छुट्टी दे दी गई है और वह पूर्ण रूप से ठीक हो रहा है।
जबड़े की हड्डी चेहरे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और मैस्टिकेशन, भाषण, निगलने और सांस लेने जैसे दैनिक कार्यों में शामिल है। एस्थेटिक रूप से, यह निचले होंठ और ठोड़ी का समर्थन करता है और गर्दन से चेहरे को एक आकर प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि इस सर्जरी के बाद, रोगी नए डेंटल इम्प्लांट्स करवा सकता हैं जो उसे खाने और ठीक से बोलने में मदद करेंगे। इस सर्जरी से मरीजों की मनोसामाजिक स्थिति और जीवन की गुणवत्ता पर बहुत प्रभाव पड़ता है, अपोलोमेडिक्स के प्लास्टिक सर्जन, डा निखिल पुरी ने बताया।
“इस तरह की जटिल सर्जरी के लिए उत्कृष्ट बुनियादी ढांचे के साथ साथ कुशल और अनुभवी सर्जनों की आवश्यकता होती है। ओरल कैंसर सर्जरी में प्रभावित हिस्से का पुनर्निर्माण एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि यह रोगी के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। इस सर्जरी के माध्यम से, रोगी सर्जरी के बाद एक सामान्य जीवन जीने में सक्षम होगा। मैं इस सर्जरी के लिए दोनों सर्जनों को बधाई देना चाहता हूं, अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल्सडॉ के प्रबंध निदेशक और सीईओ मयंक सोमानी ने बताया।

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