आरटीओ दफ्तर के बाहर दलालों का है राज, मुख्यमंत्री से की शिकायत

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मेरठ : आरटीओ कार्यालय के बाहर दलालों का राज चल रहा है। ई-रिक्शा रजिस्ट्रेशन कराने के नाम पर अवैध वसूली हो रही है। विरोध में ई-रिक्शा एसोसिएशनों व शोरूम मालिकों ने मुख्यमंत्री समेत कई जगह शिकायत की है।

 

ई-रिक्शा ऑनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद अफजाल, मेरठ इंटरप्राइजेज, अमर इंटरप्राइजेज व मिनी मेट्रो आदि लोगों ने कहा कि आरटीओ कार्यालय के बाहर दलालों का हस्तक्षेप रहता है।
आरोप है, गरीब लोग ई-रिक्शा खरीदकर जब रजिस्ट्रेशन कराने के लिए आरटीओ दफ्तर में जाते हैं तो वहां दलाल उन्हें घेर लेते हैं। रजिस्ट्रेशन कराने के नाम पर 500 रुपये मांगे जाते हैं।
यदि कोई नहीं देता तो उसके साथ मारपीट की जाती है। वह कार्यालय के अंदर तक नहीं घुसने देते हैं। दो दलालों के विरुद्ध मुकदमा भी चल रहा है, लेकिन अब वह फिर से कार्यालय में सक्रिय हो गए हैं।
वह अपने करीब 10 साथियों के साथ कार्यालय के बाहर खड़े होते हैं। उन्होंने अवैध वसूली करने वाले लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। चेतावनी दी है कि
यदि एक सप्ताह के अंदर कार्रवाई नहीं होती है तो ई-रिक्शा एसोसिएशन हड़ताल कर डीएम कार्यालय के बाहर एक दिवसीय धरना देगी।
उन्होंने मुख्यमंत्री के अलावा परिवहन मंत्री आदि से भी शिकायत की है। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया सरकार ने ऑनलाइन कर रखी है। यदि कोई दलाल किसी से रुपये मांगता है तो तत्काल मुझे अवगत कराया जाए।
आरोपित पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। -डा. विजय कुमार, आरटीओ, मेरठ 
चौ. चरण सिंह विवि शिक्षक संघ के नाम से गठित पूर्व मूटा और नए मूटा में घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है।
दोनों मूटा स्वयं को सही और दूसरे को गलत मूटा बता रहे हैं। पिछले दिनों डा. विकास के मूटा अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद शुरू हुए घमासान में अब पूर्व मूटा के महासचिव डा. जय कुमार सरोहा ने नए मूटा से जुड़े पदाधिकारियों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
उन्होंने शिक्षक विरोधी कार्य करने के लिए छह वर्ष या आजीवन निलंबित करने के लिए जवाब मांगा है। डा. सरोहा ने कहा कि यह छद्म मूटा पूर्ण रूप से फेक संगठन है।
जिसका आज तक कभी भी, कहीं भी, कोई चुनाव नहीं हुआ है। यह एक जेब में रहने वाला जेबी संगठन है। जिसका शिक्षक हितों से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं है।
यह सब लोग अपने स्वार्थ पूर्ति हेतु इस प्रकार की फेक इकाई बनाकर अपने हितों की पूर्ति करना चाहते हैं। शिक्षक हितों से इनका कोई संबंध नहीं है।
डा. संतराम जो संगठन के स्वंभू अध्यक्ष हैं जिस संगठन के प्रति प्रश्नवाचक चिन्ह लगा रहे हैं उसी के लिए हुए 2017 के डीएवी कॉलेज मुजफ्फरनगर के चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर पराजित हो चुके हैं।
वहीं नए मूटा के अध्यक्ष डा. संत राम व महामंत्री डा. गौतमवीर ने कहा कि वैधानिक मूटा न होने के कारण अंतरिम मूटा बनाई गई थी। शिक्षक अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। शिक्षकों को प्रोफेशनल नेताओं की जरूरत नहीं है बल्कि
ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता वर्तमान में हो गई थी जो शिक्षकों की मांगों को भावनात्मक एवं संवेदनशीलता से समझ सके।

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मुद्दों को सकारात्मक नेतृत्व की आवश्यकता नेतृत्व की आवश्यकता है न कि उनको भ्रमित करने की। पंजीकृत मूटा गठित होने के बाद किसी अन्य मूटा के होने का औचित्य नहीं है।

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