Lakhs of rupees scam by forcing caretakers to do duty in Delhi's Rain Basero
दिल्ली के रैन बसेरो
बात कर रहे है देश की राजधानी दिल्ली के रैन बसेरो में हो रही असुविधा,शोषण और घोटालों की। दिल्ली में अंदाजीत 200 के आस पास रैन बसेरा कार्यरत है। जहा हजारो बेघर आश्रय लेते है। परंतु बेघरों को प्राथमिक सुविधा भी उपलब्ध नहीं होती। अन्य विशेष सुविधा की बात दूर रही। इसी को लेकर पिछले कुछ समय में लगातार दिल्ली हाई कोर्ट से भी डुसीब को कई बार असुविधा दूर करने हेतु सख्ती से आदेश दिया गया है। इनसे बावजूद रैन बसेरो में बेघरों को असुविधा, शोषण और भ्रष्टाचार कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। हाल ही में दिल्ली लीगल अथॉरिटीज ने दिल्ली हाई कोर्ट में रैन बसेरे की असुविधा के बारे में रिपोर्ट सोपी है। रिपोर्ट मे इस बात का भी साफ उल्लेख है की रैन बसेरे मे रहने वाले बेघरो को प्राथमिक सुविधा भी मुहैया नही हो रही।
सरकार के मार्गदर्शन मुजब सभी रैन बसेरो में 3 केयरटेकर, एक रिलीवरऔर एक सफाई कर्मचारी की ड्यूटी रहती है। परंतु जमीनी स्तर पर कही 2 तो कही 3 केयरटेकर ही ड्यूटी कर रहे है। जब हमने इस विषय को डुसीब में बताया तो डुसीब ने साफ कहा सभी जगह पर 3 केयर टेकर और 1 रिलीवर कार्यरत है। इस समस्या से हमने डुसीब के नाईट शेल्टर के डायरेक्टर को भी अवगत कराया परंतु उनका प्रत्युत्तर नहीं आया। फिर हमने जमीनी हकीकत सामने लाने का कार्य शरू किया।
जमीनी स्थिति की सच्चाई का जायजा लेने हेतु दिल्ली के विभिन्न इलाको के 5 रैनबसेरे की मुलाकात की, जिनमे अक्षरधाम , ISBT कश्मीरी गेट निगमबोध घाट, सराई काले खां और गड़ी इलाके के रैन बसेरो की जमीनी स्थति का जायजा लिया। वहा जमीनी स्तर पर बेघरों से और केयरटेकर बात की। तब हमने पाया की सरकारी कागजों में और जमीनी स्तर पर जमीन-आसमान का अंतर है। पर कोई भी केयर टेकर ये कैमरे के सामने ये सच्चाई बताने से साफ मना करते है।
क्यू की वो ये बात भली भांति जानते है की जैसे उसने कैमरे के सामने सच्चाई बताई तो उनकी नौकरी चली जाएगी। और बेघरो को रैन बसेरे से निकाल देने का डर। हमने वो सभी रैन बसेरो में रहने वाले से भी बात की तभी हमने जो 5 शेल्टर का दौरा किया वहां जमीनी स्तर पर कही पर भी रिलीवर कार्यरत नहीं पाया। रिलीवर का नाम और हाजीरी सभी रैन बसेरो में भरा जाता है पर ड्यूटी पर कभी आता नही।
हलाकि सरकार द्वारा सभी रैन बसरा संचालन करती संस्था को 3 केयर टेकर, एक रिलीवर और एक सफाई कर्मचारी की तनख्वाह का भुगतान किया जाता है। फीर भी कही तो सिर्फ 2 केयर टेकर से ही रैन बसेरा चल रहा है। ऐसी जमीनी स्थिति देखकर कई सवाल खड़े होते है। अगर कर्मचारी पुरते नहीं है तो उनके नाम की तनख्वाह कहा जाती है ? क्या ये किसी की साठगांठ से चल रहा है ? हलाकि दिल्ली का एक भी रैन बसेरा ऐसा नहीं होगा जिसमे 3 केयरटेकर और 1 रिलीवर कार्यरत हो पर ये बात डुसीब मानने को तैयार नहीं है। ये सारा घोटाला कही न कही किसी के साठगांठ से ही संभव है।
अगर इसकी जमीनी जाँच हो और रैन बसेरे में कार्यरत सभी कर्मचारियों के ड्यूटी का क्रोस वेरिफाय हो तो सच सामने आ सकता है। दिल्ली में करीबन 200 रैन बसेरे है औसतन 16000 रुपये तनख्वाह से जोड़ा जाये तो हर महीने का सभी रैन बसेरे से मिलकर लाखो का संभवित घोटाला सामने आ सकता है। मजबूर और बेबस केयरटेकरो से ड्यूटी करवा कर लाखो रुपये का घोटाला होता नजर आता है। हालांकि डुसीब सीधे सी एम अरविंद केजरीवाल की निगरानी में है। सी एम की सीधी निगरानी में होने के बावजूद केयरटेकरो का शोषण होता साफ दिख रहा है।
राष्ट्रीय जजमेन्ट दिल्ली
भावेश पिपलिया

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