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*********|| जय श्री राधे ||*********
🌺🙏 *महर्षि पाराशर पंचांग* 🙏🌺
🙏🌺🙏 *अथ  पंचांगम्* 🙏🌺🙏
*********ll जय श्री राधे ll*********
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*दिनाँक-: 01/08/2020,शनिवार*
त्रयोदशी, शुक्ल पक्ष
श्रावण
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)
तिथि ——-त्रयोदशी 21:53:49         तक
पक्ष —————————शुक्ल
नक्षत्र ————-मूल 06:47:18
योग ————वैधृति 09:21:58
करण ———कौलव 10:15:03
करण ———–तैतुल 21:53:49
वार ————————-शनिवार
माह ————————– श्रावण
चन्द्र राशि    ———————धनु
सूर्य राशि    ——————–कर्क
रितु —————————–वर्षा
आयन ——————दक्षिणायण
संवत्सर ———————-शार्वरी
संवत्सर (उत्तर) ————-प्रमादी
विक्रम संवत —————-2077
विक्रम संवत (कर्तक) —-2076
शाका संवत —————-1942
वृन्दावन
सूर्योदय —————-05:43:50
सूर्यास्त —————–19:06:51
दिन काल   ————13:23:00
रात्री काल ————-10:37:30
चंद्रोदय —————-17:29:54
चंद्रास्त —————–28:06:28
लग्न —-कर्क 15°5′ , 105°5′
सूर्य नक्षत्र ——————–पुष्य
चन्द्र नक्षत्र ———————-मूल
नक्षत्र पाया ———————ताम्र
*🚩💮🚩  पद, चरण  🚩💮🚩*
भी —-मूल 06:47:18
भू —-पूर्वाषाढा 12:46:15
धा —-पूर्वाषाढा 18:46:31
फा —-पूर्वाषाढा 24:48:08
*💮🚩💮  ग्रह गोचर  💮🚩💮*
        ग्रह =राशी   , अंश  ,नक्षत्र,  पद
========================
सूर्य=कर्क 15°22  ‘      पुष्य,      4   ड
चन्द्र = धनु 28°23 ‘ मूल      ‘   4  यू
बुध = मिथुन 26 °57 ‘ पुनर्वसु  ‘   3  हा
शुक्र= मिथुन 00°55, मृगशिरा  ‘   3   का
मंगल=मीन  24°30’     रेवती  ‘ 3   का
गुरु=धनु  26°22 ‘   पू oषा o ,    4   ढा
शनि=मकर 04°43’ उ oषा o   ‘ 3   जा
राहू=मिथुन 02°55  ‘ मृगशिरा ,   3  का
केतु=धनु  02 ° 55 ‘       मूल    , 1  ये
*🚩💮🚩शुभा$शुभ मुहूर्त🚩💮🚩*
राहू काल 09:05 – 10:45 अशुभ
यम घंटा 14:06 – 15:46 अशुभ
गुली काल 05:44 – 07:24    अशुभ
अभिजित 11:59 -12:52 शुभ
दूर मुहूर्त 07:31 – 08:24 अशुभ
🚩गंड मूल 05:44 – 06:47 अशुभ
💮चोघडिया, दिन
काल 05:44 – 07:24 अशुभ
शुभ 07:24 – 09:05 शुभ
रोग 09:05 – 10:45 अशुभ
उद्वेग 10:45 – 12:25 अशुभ
चर 12:25 – 14:06 शुभ
लाभ 14:06 – 15:46 शुभ
अमृत 15:46 – 17:26 शुभ
काल 17:26 – 19:07 अशुभ
🚩चोघडिया, रात
लाभ 19:07 – 20:27 शुभ
उद्वेग 20:27 – 21:46 अशुभ
शुभ 21:46 – 23:06 शुभ
अमृत 23:06 – 24:26* शुभ
चर 24:26* – 25:45* शुभ
रोग 25:45* – 27:05* अशुभ
काल 27:05* – 28:25* अशुभ
लाभ 28:25* – 29:44* शुभ
होरा, दिन
शनि 05:44 – 06:51
बृहस्पति 06:51 – 07:58
मंगल 07:58 – 09:05
सूर्य 09:05 – 10:12
शुक्र 10:12 – 11:18
बुध 11:18 – 12:25
चन्द्र 12:25 – 13:32
शनि 13:32 – 14:39
बृहस्पति 14:39 – 15:46
मंगल 15:46 – 16:53
सूर्य 16:53 – 17:59
शुक्र 17:59 – 19:07
🚩होरा, रात
बुध 19:07 – 19:59
चन्द्र 19:59 – 20:53
शनि 20:53 – 21:46
बृहस्पति 21:46 – 22:39
मंगल 22:39 – 23:32
सूर्य 23:32 – 24:26
शुक्र 24:26* – 25:19
बुध 25:19* – 26:12
चन्द्र 26:12* – 27:05
शनि 27:05* – 27:58
बृहस्पति 27:58* – 28:51
मंगल 28:51* – 29:44
*नोट*– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।
*💮दिशा शूल ज्ञान————-पूर्व*
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो लौंग अथवा कालीमिर्च खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
*शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l*
*भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll*
*🚩  अग्नि वास ज्ञान  -:*
*यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,*
*चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।*
*दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,*
*नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्*
*नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।*
       13 + 7 + 1 = 21  ÷ 4 = 1 शेष
पाताल लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l
*💮    शिव वास एवं फल -:*
    13 + 13 + 5 = 31  ÷ 7 = 3 शेष
वृषभारूढ़  = शुभ कारक
*🚩भद्रा वास एवं फल -:*
*स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।*
*मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।*
*💮🚩    विशेष जानकारी   🚩💮*
* शनि प्रदोष व्रत (शिव पूजन)
* लोकमान्य तिलक पुण्य तिथि
* आखेटक त्रयोदशी (शिव पवित्रा धारण)
*💮🚩💮   शुभ विचार   💮🚩💮*
अत्यासन्ना विनाशाय दूरस्था न फलप्रदाः ।
सेव्यतां मध्यभागेन राजविह्निगुरुस्त्रियः ।।
।।चा o नी o।।
    जो व्यक्ति राजा से, अग्नि से, धर्म गुरु से और स्त्री से बहुत परिचय बढ़ाता है वह विनाश को प्राप्त होता है. जो व्यक्ति इनसे पूर्ण रूप से अलिप्त रहता है, उसे अपना भला करने का कोई अवसर नहीं मिलता. इसलिए इनसे सुरक्षित अंतर रखकर सम्बन्ध रखना चाहिए.
*🚩💮🚩  सुभाषितानि  🚩💮🚩*
गीता -: विभूतियोग अo-10
यच्चापि सर्वभूतानां बीजं तदहमर्जुन ।,
न तदस्ति विना यत्स्यान्मया भूतं चराचरम्‌ ॥,
और हे अर्जुन! जो सब भूतों की उत्पत्ति का कारण है, वह भी मैं ही हूँ, क्योंकि ऐसा चर और अचर कोई भी भूत नहीं है, जो मुझसे रहित हो॥,39॥,

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