आम बजट के साथ ही पेश होने वाले रेल बजट से यात्रियों को बड़ी उम्मीदें हैं।
आगरा के लोगों का कहना है कि ट्रेनों में रिजर्वेशन (आरक्षित सीट) मिलने में खासी कठिनाई आती है।
आम यात्रियों को आसानी से रिजर्वेशन मिले।
स्लीपर कोचों की संख्या बढ़ाई जाए।
ट्रेनों में खानपान की क्वालिटी में भी सुधार की जरूरत है।
यात्री परामर्शदात्री समिति के सदस्यों का कहना है कि किराये में वृद्धि नहीं होनी चाहिए।
आगरा को बनारस और लखनऊ के लिए सीधी ट्रेनें मिलनी चाहिए।
ट्रेनों में स्लीपर कोच बढ़ाएं
शहीद नगर के मनीष शर्मा ने कहा कि ट्रेनों में त्योहारी सीजन में रिजर्वेशन कराना टेढ़ी खीर होता है।
तत्काल कोटे से भी कई दफा टिकट नहीं मिल पाता है।
ऐसी स्थिति में व्यस्त ट्रेनों में स्लीपर और साधारण कोच भी बढ़ाए जाने चाहिए।
ट्रेनों में दिए जाने वाले खानपान की गुणवत्ता में सुधार होना चाहिए।
छोटे स्टेशनों पर बढ़े ठहराव
दैनिक यात्री मोहम्मद अरशद ने कहा कि ट्रेनों का ठहराव बिल्लोचपुरा,
ईदगाह जैसे स्टेशनों पर बहुत कम दिया जाता है।
छोटे स्टेशनों पर ट्रेनों का एक मिनट का ठहराव दिया जाए। स्टेशनों पर सुविधाओं की कमी है।
ट्रेनों में सुरक्षा की ओर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
आगरा से बनारस के बीच नई ट्रेन चलाएं
रेल परामर्शदात्री समिति के सदस्य राजकुमार शर्मा ने कहा कि आगरा से बनारस के बीच कोई सीधी ट्रेन नहीं है।
हमने प्रस्ताव में आगरा से बनारस के लिए सीधी ट्रेन शुरू करने,
आगरा से काठगोदाम के बीच काम पूरा हो चुका है।
यहां से नई ट्रेन चलाने और लखनऊ इंटरसिटी के स्थान पर नई ट्रेन चलाई जानी चाहिए।
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दैनिक यात्रियों को दें रियायत
दैनिक यात्री मनोज मेहता ने बताया कि आगरा से बड़ी संख्या में दैनिक यात्री दिल्ली का सफर करते हैं।
ऐसे में दैनिक यात्रियों के लिए भी रेलवे को कोई सहूलियत देनी चाहिए।
ट्रेनों में पानी, एसी खराब होनेकी समस्याएं बढ़ गई हैं।
मेंटिनेंस पर ध्यान देना चाहिए।
छात्रों को परीक्षा के लिए छूट दी जाए
छात्र हर्ष ने कहा कि ट्रेनों में छात्र प्रतियोगी परीक्षा देने के लिए आते जाते हैं।
कई बार किराया बहुत ज्यादा होता है।
ऐसे में छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा में भाग लेने के लिए छूट दी जानी चाहिए।
ट्रेनों में सफर सुरक्षित हो
यात्री वर्षा सिंह ने कहा कि ट्रेनों में अकेले सफर करने में डर महसूस होता है।
ऐसे में ट्रेनों में स्क्वैड और महिला आरक्षियों की तैनाती की जानी चाहिए,
ताकि महिला यात्री सुरक्षित महसूस कर सकें।

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