पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) कड़क सर्दी में सेना की ताबड़तोड़ मूवमेंट की आंच से तप रहा है। नीलम वैली में भारत-पाक के बीच जारी गोलीबारी की वजह से पाकिस्तानी सेना की असामान्य मूवमेंट देखी जा रही है।
पिछले 10 दिन से सैन्य वाहनों के लंबे-लंबे काफिले भारी तोपों के साथ यहां पहुंच रहे हैं। 1999 के करगिल युद्ध के बाद पहली बार ऐसा माहौल है कि
सेना की तमाम रिजर्व टुकड़ियां भी एलओसी के आसपास कैंप बना रही हैं। सेना का सबसे बड़ा जमावड़ा नीलम वैली और देवा सेक्टर में बढ़ा है। नीलम वैली में भी आजकल संघर्ष विराम तोड़ा जा रहा है।
वहां के एक स्थानीय पत्रकार ने बताया कि सेना के ट्रक, जिनमें भारी आर्टिलरी हथियार लाए जा रहे हैं, को प्लास्टिक शीट्स से कवर किया गया है। दरअसल, पाकिस्तान को डर है कि भारत पीओके में बड़ी कार्रवाई कर सकता है।
इसकी पुष्टि सेना के एक उच्च पदस्थ अफसर ने की। उन्होंने बताया कि एलओसी पर तनाव पहले से ज्यादा है। भास्कर ने जब उक्त अफसर से पूछा कि इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स क्या कह रही हैं तो अफसर ने सिर्फ इतना कहा कि
भारत ने अगर पीओके में आगे बढ़ने की कोशिश की तो पाक के लिए उसे रोकना ही सबसे अहम होगा। इसीलिए सेना की रिजर्व टुकड़ियां यहां लाई जा रही हैं। बर्फबारी बढ़ने से सारी तैयारियां पहले ही करनी जरूरी है।
सेना के मूवमेंट को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी से बात की। उन्होंने एलओसी पर सेना के जमावड़े पर प्रतिक्रिया नहीं दी।
लेकिन, इतना जरूर कहा कि- ‘यह सेना का मसला है, सेना ही जाने। तनाव बढ़ रहा है तो हमारी सेना भी अपनी तैयारियां कर रही होंगी। मुझे इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना।’
पाक जहां एक ओर सेना बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर भारतीय प्रहार से बचने के लिए पीओके के नागरिकों को ढाल बना रहा है। लोगों में पाक सेना के प्रति बढ़ रहे अविश्वास को देखते हुए प्रधानमंत्री इमरान खान ने गुरुवार को एलओसी पर बसे लोगों को बस्तियां नहीं छोड़ने के लिए आर्थिक मदद की घोषणा की।
यह मदद एलओसी के दो किमी के दायरे में बसे 33,498 परिवारों की सभी विवाहित महिलाओं को हर माह 10 डॉलर (1546 पाकिस्तानी रुपए) के रूप में मिलेगी। लेकिन, इसकी शर्त यह होगी कि ये परिवार सीमा न छोड़ें। सीमा छोड़ने पर आर्थिक मदद वापस ले ली जाएगी।

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