राजधानी लखनऊ में आयुष्मधारक मरीजों से इलाज के नाम पर वसूली हो रही है।
ऐसा ही एक मामला इंदिरानगर के शेखर हॉस्पिटल का सामने आया है।
आयुष्मान कार्ड धारक ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की है।
बाराबंकी जिले के फतेहपुर निवासी रितिक निगम के पास आयुष्मान कार्ड (संख्या पी4 सीएसएमजेयूक्यू 7) है।
उनका आरोप है कि तबीयत खराब होने पर शेखर हॉस्पिटल गया।
भर्ती के वक्त छह हजार रुपये जमा कराए गए।
जांच में डेंगू बताया गया। दूसरे दिन आयुष्मान का कार्ड मंगवाकर अस्पताल प्रशासन को दिखाया।
आयुष्मान मित्र उनका कार्ड कुछ देर अपने पास रखे रहा,
बाद में कह दिया कि अस्पताल आयुष्मान योजना में शामिल नहीं है।
20 से 24 सितंबर तक भर्ती रितिक के इलाज के नाम पर 31,500 रुपये वसूले गए।
पीड़ित ने मामले की शिकायत चिकित्सा मंत्री और सीएमओ से भी की है।
शिकायती पत्र में रुपये जमा करने की रसीदें भी लगाई हैं।
आयुष्मान में पंजीकृत है अस्पताल
शेखर हॉस्पिटल के फोन नंबर पर कॉल करने पर बताया गया कि
अस्पताल आयुष्मान योजना में पंजीकृत है और
यहां मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
मरीज रितिक का मुफ्त में इलाज न करने के संबंध में अस्पताल प्रशासन ने बात करने से मना कर दिया।
अस्पताल संचालक की बात
शेखर हॉस्पिटल की निदेशक डॉ. रिचा मिश्रा का कहना है कि
आयुष्मान योजना में कई जांचें शामिल नहीं हैं।
संभव है कि वे बाहर कराई गई हों और उन्हीं के रुपये जमा कराए गए हों।
मामले को दिखवाया जाएगा। समस्या थी तो मरीज को पहले अस्पताल में शिकायत करनी चाहिए थी।
दो अस्पतालों पर लग चुका है तिगुना जुर्माना
आयुष्मान कार्ड धारक मरीज से रुपये लेने पर तिगुना जुर्माना वसूलने का आदेश है।
राजधानी के दो अस्पतालों पर यह जुर्माना लग चुका है।
नियम है कि यदि अस्पताल में किसी मरीज का इलाज चल रहा है और
उसकी आगे के इलाज की सुविधाएं अस्पताल में नहीं हैं तो आसपास के नजदीकी अस्पताल में आयुष्मान के तहत केस स्थानांतरित किया जाए।
इलाज के नाम पर रुपये न लिए जाएं।
इसके बाद भी बालागंज स्थित यूपी हॉस्पिटल ने मलिहाबाद की लड़की का इलाज दूसरे से कराने के नाम पर रुपये लिए थे।
मामले की शिकायत होने पर जांच हुई और अस्पताल पर जुर्माना लगा।
इसी तरह गोमतीनगर के आहूजा अस्पताल पर भी जुर्माना लगाया जा चुका है।
 सीएमओ क्या कहते हैं
सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल का कहना है कि
अभी तक शिकायती पत्र मिला नहीं है।
इलाज के नाम पर आयुष्मान कार्ड धारक से रुपये नहीं लिए जा सकते हैं।
यदि ऐसा हुआ है तो जांच कराई जाएगी।
मामला सही पाए जाने पर जुर्माना लगाया जाएगा।
इससे पहले दो अस्पतालों पर जुर्माना लगाया जा चुका है।
खबर छपी तो चेता प्रशासन, मैनेजर को हटाया
आयुष्मान योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनाने में जन सुविधा केंद्रों की भागीदारी कम होने के मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है।

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जिला प्रबंधक को हटा दिया गया है।
मालूम हो कि ‘अमर उजाला’ ने 27 सितंबर के अंक में गोल्डन कार्ड बनाने में जन सुविधा केंद्र लापरवाह शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।
बताया था कि अभी तक जन सुविधा केंद्रों की भागीदारी सिर्फ 20 से 25 फीसदी है।
अन्य जिलों में 80 फीसदी से ज्यादा कार्ड जन सुविधा केंद्रों ने ही बनाए हैं।
राजधानी में करीब पांच सौ से अधिक जन सुविधा केंद्रों को यह जिम्मेदारी दी गई है।
खबर छपने के बाद एडीएम ने जनसुविधा केंद्र के जिला प्रबंधक को हटा दिया है।
उनके स्थान पर बनाए गए नए प्रबंधक और स्वास्थ्य विभाग के बीच बैठक हुई है।

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