भाषा, सामूहिक स्मृति और ज्ञान को जीवित रखने का एक सशक्त माध्यम

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महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय में आज दिनांक 14.09.2020 को विश्वविद्यालय के बहुउद्देशीय सभागार में वेद विभाग के आचार्य एवं अध्यक्ष तथा विश्वविद्यालय प्रभारी प्रो. उमाशंकर तिवारी के मुख्यातिथ्य, ज्योतिष विभागाध्यक्ष प्रो. मानवेन्द्र पाण्डेय के विशिष्टातिथ्य तथा हिन्दी के वरिष्ठ विद्वान पं. रमेशचन्द्र मिश्र की अध्यक्षता में हिन्दी दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गुरु परम्परा पूजन एवं वैदिक मंगलाचरण से कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
मुख्य अतिथि की आसंदी से बोलते हुये प्रो. तिवारी ने कहा कि भाषा सामूहिक स्मृति और ज्ञान को जीवित रखने का एक सशक्त माध्यम है। किसी भी स्वतन्त्र राष्ट्र की अपनी एक भाषा होती है जो उसका गौरव होती है। राष्ट्रीय एकता और राष्ट्र के स्थायित्व के लिए राष्ट्र भाषा का होना नितान्त आवश्यक है। किसी भी भाषा को राष्ट्र भाषा बनने के लिए उसमें सर्वव्यापकता, प्रचुर साहित्य रचना, बनावट की दृष्टि से सरलता और वैज्ञानिकता, सब प्रकार के भावों को प्रकट करने की सामर्थ्य इत्यादि गुण होने अनिवार्य होते हैं। अत्यन्त खुशी की बात है कि हिन्दी भाषा में ये सारे गुण विद्यमान हैं।
विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. पाण्डेय ने कहा कि आज भी हिन्दी देश के कोने-कोने में बोली जाती है। अहिन्दी भाषी भी थोड़ी बहुत और टूटी-फूटी हिन्दी बोल और समझ सकते हैं। यह निर्विवाद सत्य है कि व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास अपनी ही भाषा के पठन-पाठन से होता है, अन्य किसी भाषा से नहीं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हिन्दी के वरिष्ठ विद्वान पं. मिश्र ने कहा हम सब का परम दायित्व है कि हिन्दी को राष्ट्रभाषा के पद पर आसीन करने के लिए हर सम्भव प्रयत्न करें। व्यवहार में हिन्दी भाषा का प्रयोग हीनता नहीं बल्कि गौरव का प्रतीक है, हमारे पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी पहले भारतीय थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी में भाषण देकर हिन्दी को गौरवान्वित किया था।
योग विभागाध्यक्ष प्रो. ओमनारायण तिवारी ने हिन्दी भाषा के वैशिष्ट्य को प्रतिपादित करते हुये कहा कि हिन्दी केवल एक भाषा ही नहीं है बल्कि समाज को एक दूसरे से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। शिक्षा विभाग के सह प्राध्यापक डाॅ. नन्दकिशोर नामदेव ने हिन्दी की अमरकृति रामचरित मानस के आधार पर जीवनोपयोगी कथोपकथन का दृष्टान्त देते हुये हिन्दी भाषा के वैशिष्ट्य का प्रतिपादन किया।
कार्यक्रम का सम्यक् संचालन शिक्षा विभाग की सहायक प्राध्यापिका श्रीमति सुदेशबाला जैन एवं आभार प्रदर्शन वेद विभाग के सहायक प्राध्यापक श्री राजेश शर्मा ने किया। इस अवसर पर सतीश तिवारी, वर्षा साहू, मेघा चैरसिया, हरिनारायण शर्मा, धनीराम त्रिपाठी, मनीष पाण्डेय, मुकेश तिवारी,धुवकुमार पाठक , पवन चैरसिया इत्यादि की उपस्थिति उल्लेखनीय थी।

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